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खेल

शानदार उपलब्धि: लाठ की काजल ने अखाड़े की मिट्टी से लेकर विश्व मंच तक का तय किया सफर

हरियाणा के सोनीपत क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले लाठ गांव की प्रतिभाशाली बेटी काजल ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन के दम पर कुश्ती के अखाड़े से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है।

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Ankit Yadav
15 सित 2026, 14:13
शानदार उपलब्धि: लाठ की काजल ने अखाड़े की मिट्टी से लेकर विश्व मंच तक का तय किया सफर
खेल जगत में हरियाणा का नाम हमेशा से ही रोशन रहा है, और इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए लाठ गांव की बेटी काजल ने एक बार फिर से पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। ग्रामीण परिवेश की सामान्य परिस्थितियों से निकलकर उन्होंने जिस प्रकार से विश्व मंच तक का कठिन रास्ता तय किया है, वह आज की युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बन गया है। प्रारंभिक दौर में अखाड़े की लाल मिट्टी पर अभ्यास करने से लेकर विदेशी धरती पर मैट पर पसीना बहाने तक का उनका यह सफर किसी संघर्ष गाथा से कम नहीं है।

अखाड़े से ग्लोबल एरिना तक का सफर

स्थानीय स्तर पर कुश्ती के दांवपेंच सीखने के बाद काजल ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। पारंपरिक अखाड़ों में पसीना बहाने के साथ-साथ उन्होंने आधुनिक कुश्ती तकनीकों को भी आत्मसात किया, जिससे उन्हें वैश्विक प्रतियोगिताओं में खड़े होने का आत्मविश्वास मिला। उनके परिवार और स्थानीय प्रशिक्षकों का सहयोग इस पूरी यात्रा में बेहद महत्वपूर्ण रहा, जिन्होंने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। ग्रामीण इलाकों में खेल सुविधाओं की चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प के बल पर हर बाधा को पार किया और राष्ट्रीय से होते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों में अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि काजल जैसी प्रतिभावान खिलाड़ियों का उभरना इस बात का प्रमाण है कि देश के छोटे-छोटे गांवों और कस्बों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत है तो बस उन्हें सही दिशा और उचित मंच प्रदान करने की। स्थानीय स्तर पर मिल रही इस सफलता के बाद अब खेल प्रेमियों और जानकारों को उम्मीद है कि वह भविष्य में देश के लिए और भी बड़े पदक जीतकर लाएंगी। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके गृह नगर सोनीपत बल्कि पूरे प्रदेश की युवा बेटियों को खेलकूद के क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रेरित कर रही है। आने वाले दिनों में उनकी इस सफलता का असर क्षेत्रीय स्तर पर खेल संस्कृति के विकास के रूप में भी देखने को मिल सकता है। कई युवा खिलाड़ी अब उनके संघर्ष और सफलता को आदर्श मानकर अखाड़ों की ओर रुख कर रहे हैं। प्रशासन और खेल संघों द्वारा भी ऐसे खिलाड़ियों को और अधिक सुविधाएं देने की मांग जोर पकड़ने लगी है ताकि वे बिना किसी आर्थिक या सामाजिक बाधा के देश का नाम रोशन करते रहें। काजल की यह कहानी महज़ एक खिलाड़ी की जीत नहीं है, बल्कि उस अदम्य इच्छाशक्ति की दास्तां है जो असंभव को भी संभव बना देती है।
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