राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर शानदार सफलता
गांव की सामान्य पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले प्रतीक यादव ने खेल के मैदान में अपनी कड़ी मेहनत और प्रतिभा के जरिए एक विशेष मुकाम हासिल किया है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के अंतर्गत आने वाले फरीदपुर क्षेत्र के नागरिया विक्रम गांव के यह युवा निवासी हैं। उन्होंने अपनी खेल यात्रा के दौरान राष्ट्रीय जूडो प्रतियोगिता में रजत पदक अपने नाम किया है। इसके अलावा उन्होंने राज्य स्तर पर आयोजित होने वाली प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी उत्कृष्ट क्षमता का परिचय दिया है। उन्होंने वर्ष 2023 से जूडो खेल का नियमित और गंभीर अभ्यास करना शुरू किया था। इतने कम समय के अंतराल में उन्होंने अपनी खेल कला को बहुत अधिक निखारा है। कड़े अनुशासन और निरंतरता के साथ किए गए अभ्यास की बदौलत उन्होंने यह महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है। इन पदकों की प्राप्ति से उनके खेल जीवन की मजबूत शुरुआत हो चुकी है और स्थानीय स्तर पर भी उन्हें बहुत सराहना मिल रही है। उनके इस शानदार प्रदर्शन ने उनके पूरे गांव और परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े होने के बावजूद उन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से यह साबित कर दिखाया है कि लगन होने पर बड़े लक्ष्यों को पाना असंभव नहीं होता है। उनके इस सराहनीय प्रदर्शन से क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है।
कोच का मार्गदर्शन और राष्ट्रीय चयन का सफर
प्रतीक यादव की इस उल्लेखनीय सफलता के पीछे उनके कोच और परिवार का बहुत बड़ा योगदान रहा है। उनके पिता यतेन्द्र पाल सिंह अपने बेटे की इस बड़ी उपलब्धि पर बेहद गर्व का अनुभव करते हैं। उनके कोच दीक्षा शर्मा ने उन्हें जूडो खेल की सभी बारीकियों को बहुत बारीकी से सिखाया है। कोच दीक्षा ने उन्हें केवल खेल के दांव-पेंच ही नहीं सिखाए बल्कि जीवन में अनुशासन का महत्व भी समझाया है। उन्होंने प्रतीक को हर परिस्थिति में आत्मविश्वास बनाए रखने और मुश्किल समय में कभी हार न मानने की सीख दी है। इसी बेहतरीन प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के परिणामस्वरूप उनका चयन अब स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी एसजीएफआई की राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए हुआ है। यह प्रतियोगिता देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित की जा रही है जो उनके खेल करियर का एक बहुत बड़ा और अहम पड़ाव साबित होने जा रही है। उनके पिता और कोच का लगातार मिला समर्थन उनके लिए इस कठिन रास्ते पर एक बड़ी ताकत बना है। प्रतीक ने अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपनी कड़ी मेहनत के साथ-साथ अपने गुरुओं के सटीक मार्गदर्शन को भी दिया है। खेल के प्रति उनका समर्पण और उनकी यह निष्ठा आने वाले समय में उन्हें और भी बड़े मंचों पर शानदार प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित कर रही है।
ओलंपिक में स्वर्ण जीतने का बड़ा लक्ष्य
राष्ट्रीय मंच पर रजत पदक जीतने वाले प्रतीक यादव की नजरें अब दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजन पर टिकी हुई हैं। उनका एकमात्र और अंतिम लक्ष्य ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक हासिल करके अपने देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन करना है। वह केवल विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर ही संतुष्ट होने वाले नहीं हैं बल्कि उनका सपना बहुत बड़ा है। उनका यह पूरा सफर ग्रामीण इलाकों के उन तमाम युवाओं के लिए एक बहुत बड़ी मिसाल बन गया है जो तमाम तरह की सीमित सुविधाओं के बीच भी बड़े सपने देखते हैं। प्रतीक की यह सफलता पूरी तरह से यह साबित करती है कि अगर किसी खिलाड़ी को सही दिशा में उचित मार्गदर्शन मिल जाए और वह लगातार मेहनत करता रहे तो वह सफलता की किसी भी राह को खुद बना सकता है। उनके इस सफर से यह स्पष्ट होता है कि संसाधनों की कमी कभी भी किसी की प्रतिभा को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती है यदि उसके भीतर कुछ कर दिखाने का जज्बा हो। अब हर किसी की निगाहें उनके आगामी प्रदर्शन और उनके ओलंपिक के उस बड़े सपने पर टिकी हुई हैं जिसे पूरा करने के लिए वह दिन-रात मैदान पर पसीना बहा रहे हैं। उनके जैसे युवा खिलाड़ी देश के खेल भविष्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का माद्दा रखते हैं।