कंटाप
NEWS
गुरुवार, 22 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
मुझे गालियां पड़ेंगी, लेकिन...; योगेंद्र यादव ने कहा- अभी मोदी का इस्तीफा नहीं चाहते लोग      श्रद्धा दुबे तो निकली बड़ी खिलाड़ी, Z गैंग से भी कनेक्शन, लखनऊ लेकर आई पुलिस, बचना हुआ मुश्किल      Rain Alert: बन गया है कम दबाव का क्षेत्र, इन राज्यों में होने जा रही मूसलाधार बारिश, आंधी तूफान का भी अलर्ट      Tiger Shroff Attack Case में बड़ा खुलासा, वारदात से पहले शूटरों ने की थी बंदूक चलाने की प्रैक्टिस, हुआ था म      सऊदी अरब में बांग्लादेश की जिस महिला को मौत की सज़ा मिली उसके घर वालों ने दी ये जानकारी      ट्रंप के मुस्लिम शहर वाले बयान पर भड़के मैक्रों, कहा- मूर्खतापूर्ण...      PM बोले-कुछ लोग विदेशों में भारत को बदनाम कर रहे: कांग्रेस कब तक अपने फेल प्रोडक्ट की लॉन्चिंग के लिए देश क...      रिलायंस की रिफाइनरी में रुबियो का जोरदार स्वागत, अंबानी संग कई अहम मुद्दों पर हुई बात     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
खेल

वित्तीय संकट: भारत और वेस्टइंडीज सीरीज से करोड़ों की कमाई लेकिन बोर्ड खाली हाथ

भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेली जाने वाली क्रिकेट सीरीज से भारी भरकम कमाई हो रही है। इस बड़ी व्यावसायिक सफलता के बावजूद वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड को एक भी रुपया नहीं मिलेगा। बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने इस स्थिति पर अपना गहरा दुख व्यक्त किया है।

A
Ankit Yadav
16 अक्ट 2026, 13:44
वित्तीय संकट: भारत और वेस्टइंडीज सीरीज से करोड़ों की कमाई लेकिन बोर्ड खाली हाथ

सीरीज से करोड़ों की भारी कमाई

भारत और वेस्टइंडीज की क्रिकेट टीमों के बीच आयोजित होने वाली इस विशेष श्रृंखला के दौरान व्यावसायिक मोर्चे पर बंपर कमाई होती है। इस पूरी प्रतियोगिता और मुकाबलों के जरिए प्रायोजन विज्ञापनों प्रसारण अधिकारों और टिकट बिक्री के माध्यम से सैकड़ों करोड़ रुपये की भारी भरकम राशि जुटाई जाती है। खेल के इस बड़े बाजार में हर मुकाबला वित्तीय दृष्टिकोण से अत्यधिक लाभकारी साबित होता है। इस अथाह धनार्जन के बावजूद श्रृंखला के आयोजन से जुड़े एक प्रमुख प्रतिभागी देश को अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कुछ भी हासिल नहीं होता है। आधुनिक खेल प्रबंधन और वैश्विक प्रसारण अनुबंधों की जटिल प्रणालियों के कारण पैसों का यह पूरा प्रवाह एक अलग दिशा में केंद्रित हो जाता है जिससे इस तरह की वित्तीय असमानताएं खुलकर सामने आती हैं। खेल प्रेमियों और विश्लेषकों के लिए यह स्थिति खासी चौंकाने वाली है क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर होने वाले आर्थिक लाभ के बाद भी इस खेल का संचालन करने वाले एक मुख्य देश को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है।

वेस्टइंडीज बोर्ड के सीईओ का दर्द

वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने इस पूरी व्यवस्था पर अपना गंभीर दर्द और निराशा सार्वजनिक रूप से बयां की है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी के अनुसार करोड़ों की यह व्यावसायिक कमाई होने के बावजूद उनके बोर्ड के खाते में एक भी पैसा नहीं पहुंच पाता है। खेल जगत के इस शीर्ष अधिकारी ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि किस प्रकार उनके संगठन को लगातार वित्तीय तंगी से जूझना पड़ता है जबकि उनकी टीम के मैच दुनियाभर में भारी राजस्व उत्पन्न करते हैं। इस बयान के सामने आने के बाद खेल प्रबंधन और राजस्व बंटवारे के मौजूदा मॉडलों पर फिर से गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बोर्ड के शीर्ष अधिकारियों का यह दर्द साफ तौर पर यह दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर होने वाली पैसों की इस बरसात का न्यायसंगत वितरण नहीं हो पा रहा है। इस संबंध में उन्होंने अपनी व्यवस्था की लाचारी को भी बयां किया है जहाँ इतने बड़े स्तर पर खेल का आयोजन होने के बावजूद बुनियादी वित्तीय मदद से वे महरूम रह जाते हैं। क्रिकेट प्रशासन के भीतर चल रही इस तरह की विसंगतियों ने अब एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

वित्तीय पृष्ठभूमि और महत्व

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में प्रसारण अधिकारों और राजस्व के वितरण का यह पूरा गणित ऐतिहासिक समझौतों पर आधारित होता है। पारंपरिक रूप से वैश्विक क्रिकेट राजस्व का एक बहुत बड़ा हिस्सा चुनिंदा अमीर क्रिकेट बोर्डों के बीच ही मुख्य रूप से विभाजित होता है। वेस्टइंडीज जैसे ऐतिहासिक और पारंपरिक रूप से समृद्ध क्रिकेट इतिहास वाले देश को आधुनिक व्यावसायिक युग में आर्थिक रूप से संघर्ष करना पड़ रहा है। इस पृष्ठभूमि में सैकड़ों करोड़ की कमाई के बाद भी एक भी पैसा न मिलने की यह खबर खेल अर्थशास्त्र के बदलते स्वरूप को उजागर करती है। आम दर्शकों और खेल प्रेमियों के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि मैदान पर पसीना बहाने वाली टीमों और उनके संचालक बोर्डों की आर्थिक स्थिति में जमीन आसमान का अंतर हो सकता है। इस प्रकार की खबरें खेल नीति निर्धारकों पर दबाव बनाती हैं कि वे भविष्य के आयोजनों में राजस्व के अधिक न्यायसंगत और संतुलित बंटवारे पर विचार करें। यदि ऐसी ही स्थितियां बनी रहीं तो छोटे और ऐतिहासिक बोर्डों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करना और खेल का स्तर बनाए रखना बेहद कठिन हो जाएगा।

कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज