कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
नेपाल पुलिस का अलर्ट - तिब्बत की तरफ़ बना डैम टूटा, लोगों से सुरक्षित जगह पर जाने को कहा      Raksha Bandhan 2026 Shubh Muhurat LIVE: खत्म हुआ राहुकाल! फिर शुरू हुआ राखी का शुभ मुहूर्त, जानिए कब तक बां      धोखाधड़ी, उत्पीड़न और फिर मर्डर; दिल्ली की मॉडल हत्या मामले में 'जहरीले रिश्ते' का खुलासा      ज़ोहरान ममदानी को लेकर प्रवासी भारतीयों में बहस, आरएसएस ने जारी किया ये बयान      आज लोकसभा चुनाव हुए तो BJP को मिलेंगी कितनी सीटें, इंडिया गठबंधन में शामिल दलों का कैसा हाल, C-वोटर का आया सर्वे      पाकिस्तान ने फंसाया एक और ‘मुर्गा’, सऊदी अरब-तुर्की के बाद इस देश के साथ मिलिट्री डील, बदले में क्या मिलेगा...      रिजिजू ने दिए संसद का विशेष सत्र बुलाने के संकेत, परिसीमन बिल पर टिकीं निगाहें; विपक्ष में हलचल      दिल्ली आ गई 'कांदा एक्सप्रेस', 60-70 रुपये वाला प्याज अब 35 रुपये किलो, जानिए कहां मिलेगा?     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹ | SILVER (10g) ₹ | USD/INR ₹ | CRUDE OIL $ | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
टेक्नोलॉजी

बड़ा बदलाव: इसरो नहीं बनाएगा लॉन्च व्हीकल, प्राइवेट सेक्टर को सौंपी जाएगी टेक्नोलॉजी

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी की जा रही है, जिसके तहत भविष्य में लॉन्च व्हीकल्स का निर्माण इसरो खुद न करके इसकी पूरी टेक्नोलॉजी निजी क्षेत्र को सौंप देगा।

A
Ankit Yadav
23 अग 2026, 14:18
बड़ा बदलाव: इसरो नहीं बनाएगा लॉन्च व्हीकल, प्राइवेट सेक्टर को सौंपी जाएगी टेक्नोलॉजी
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो की कार्यप्रणाली में एक बहुत बड़ा और दूरगामी बदलाव देखने को मिलने वाला है। सामने आ रही ताजा जानकारियों के अनुसार, अंतरिक्ष एजेंसी अब भविष्य में खुद लॉन्च व्हीकल्स का निर्माण करने के बजाय इस पूरी तकनीक को देश के प्राइवेट सेक्टर को हस्तांतरित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। पवन गोयनका की ओर से सामने आए इस अहम नीतिगत फैसले से देश के कमर्शियल स्पेस मार्केट को एक अभूतपूर्व गति मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी कंपनियों की भागीदारी को और अधिक मजबूत करना है ताकि वैश्विक स्तर पर देश की स्थिति को और सुदृढ़ किया जा सके।

निजी उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा

देश के अंतरिक्ष उद्योग में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए यह निर्णय एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। अब तक अंतरिक्ष अभियानों के लिए रॉकेट और लॉन्च व्हीकल्स तैयार करने की मुख्य जिम्मेदारी पूरी तरह से इसरो के पास ही रही है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने स्पेस सेक्टर को निजी कंपनियों के लिए खोलकर कई बड़े सुधार किए हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होने से देश की स्टार्टअप कंपनियों और बड़ी औद्योगिक इकाइयों को सीधे तौर पर अपने बूते पर अत्याधुनिक रॉकेट विकसित करने और उनका व्यवसायीकरण करने का पूरा अवसर मिल जाएगा। इससे न केवल अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बल्कि लागत में भी भारी कमी आने की संभावना है। इस रणनीतिक बदलाव के बाद इसरो का मुख्य ध्यान पूरी तरह से अंतरिक्ष अनुसंधान, उन्नत वैज्ञानिक मिशनों, और भविष्य की डीप-स्पेस खोजों पर केंद्रित हो जाएगा। वहीं दूसरी ओर, कमर्शियल लॉन्चिंग और उत्पादन का भारी-भरकम जिम्मा निजी उद्योगों के कंधों पर आ जाएगा। जानकारों का मानना है कि इस नीति से भारत ग्लोबल स्पेस इकॉनमी में अपनी हिस्सेदारी को बहुत कम समय में कई गुना बढ़ाने में कामयाब रहेगा। लखनऊ समेत देश भर के तकनीकी हलकों में इस बड़े नीतिगत बदलाव की चर्चा जोरों पर है और इसे अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इस तकनीक के हस्तांतरण की प्रक्रिया और उससे जुड़े तौर-तरीकों को लेकर सरकार और अंतरिक्ष एजेंसी की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाने की उम्मीद है। देश के वैज्ञानिक समुदाय और कारोबारी जगत दोनों ही इस बात को लेकर बेहद उत्साहित हैं कि कैसे यह कदम भारत को अंतरिक्ष तकनीक के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बना देगा। उम्मीद की जा रही है कि निजी क्षेत्र की तकनीकी दक्षता और व्यावसायिक सोच मिलकर देश के अंतरिक्ष अभियानों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी और वैश्विक बाजार में भारत की पकड़ को और अधिक मजबूत करेगी।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज