पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास की दिशा में भारत ने वैश्विक स्तर पर एक और ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा जारी अद्यतन आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश की कुल स्थापित गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता (जिसमें सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बड़ी और छोटी जलविद्युत परियोजनाएं तथा परमाणु ऊर्जा शामिल हैं) 300 गीगावॉट (GW) के जादुई आंकड़े को सफलता पूर्वक पार कर गई है। यह उपलब्धि पेरिस जलवायु समझौते के तहत भारत द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंच पर निर्धारित किए गए हरित लक्ष्यों को समय से काफी पहले हासिल करने की दिशा में एक बहुत बड़ी छलांग है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने कहा कि भारत आज दुनिया में सबसे तेजी से ऊर्जा परिवर्तन (energy transition) करने वाले प्रमुख देशों में शीर्ष पर है। सरकार द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में किए गए व्यापक नीतिगत सुधारों, उत्पादकता से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं, और सोलर मैन्युफैक्चरिंग को दिए गए बढ़ावा के कारण ही देश में इतनी तेजी से हरित ऊर्जा परियोजनाओं का निर्माण संभव हो पाया है। वर्तमान में भारत की कुल बिजली उत्पादन क्षमता का 45 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से आ रहा है, जो 2030 तक 500 गीगावॉट के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के भारत के संकल्प को और मजबूत करता है।
ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर और निजी निवेश में भारी बढ़ोतरी
ऊर्जा और पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इस बड़ी सफलता के पीछे देश के विभिन्न राज्यों में स्थापित किए गए अल्ट्रा-मेगा ग्रीन एनर्जी पार्कों और ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर का आधुनिकीकरण है। राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों ने विशाल सौर और पवन परियोजनाओं को जमीन पर उतारने में अग्रणी भूमिका निभाई है। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के निर्माण से उत्पादित बिजली को बिना किसी नुकसान के राष्ट्रीय ग्रिड तक पहुंचाना आसान हुआ है।
इसके साथ ही, पीएम-सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना जैसी जनकेंद्रित पहलों ने देश के लाखों आम नागरिकों और मकान मालिकों को भी अपनी छतों पर सोलर सिस्टम लगाकर खुद बिजली उत्पादक बनने के लिए प्रेरित किया है। निजी क्षेत्र द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में किए जा रहे अरबों डॉलर के निवेश से न केवल कार्बन उत्सर्जन में सालाना करोड़ों टन की कमी आ रही है, बल्कि देश में हरित नौकरियों (green jobs) के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।