भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आज यानी 10 अगस्त 2026 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) के दूसरे लॉन्च पैड से अपने अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ओशनसैट-4 को पीएसएलवी-सी62 रॉकेट के जरिए सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में लॉन्च कर दिया है। यह मिशन देश की समुद्री सुरक्षा और मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। सुबह ठीक 9:58 बजे निर्धारित काउंटडाउन के बाद राॅकेट ने अपनी गर्जना के साथ आसमान की तरफ उड़ान भरी और ठीक सत्रह मिनट बाद उपग्रह अपनी निर्धारित कक्षा में स्थापित हो गया।
समुद्री अर्थव्यवस्था और मौसम विज्ञान को मिलेगा बढ़ावा ओशनसैट-4 के जरिए वैज्ञानिकों को महासागरों की सतह के तापमान, फाइटोप्लाankton वितरण और हवा की गति का अत्यंत सटीक डेटा प्राप्त होगा, जिससे चक्रवातों के आने की भविष्यवाणी पहले से कहीं अधिक समय रहते की जा सकेगी। इस उपग्रह पर लगे अत्याधुनिक पेलोड्स विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में मछली पकड़ने वाले समुदायों और नेवीगेशन के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगे। इसरो के अध्यक्ष ने इस सफल प्रक्षेपण के बाद वैज्ञानिकों की पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम में आत्मनिर्भरता की ओर एक और मील का पत्थर है।
अगले साल के अंतरिक्ष अभियानों की रूपरेखा इस सफल लॉन्चिंग के साथ ही इसरो ने आने वाले महीनों के लिए अपने महत्वाकांक्षी चंद्र और गगनयान मानवरहित मिशनों की तैयारियों को भी तेज कर दिया है। अंतरिक्ष विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि आने वाले दिनों में भारत वाणिज्यिक उपग्रह प्रक्षेपण के क्षेत्र में और भी नए रिकॉर्ड बनाने की तैयारी कर रहा है, जिससे वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में देश की स्थिति और अधिक मजबूत होगी। इस ऐतिहासिक सफलता के बाद देश भर के वैज्ञानिक संस्थानों और शैक्षणिक जगत में जश्न का माहौल है तथा युवा वैज्ञानिकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।