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मैन्युफैक्चरिंग विजन: अश्विनी वैष्णव ने भारत को ग्लोबल हब बनाने की योजना रखी

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देश को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का एक बड़ा वैश्विक केंद्र बनाने को लेकर अपना अहम विजन साझा किया है।

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Ankit Yadav
22 अग 2026, 11:48
मैन्युफैक्चरिंग विजन: अश्विनी वैष्णव ने भारत को ग्लोबल हब बनाने की योजना रखी
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत को तकनीकी और विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा और दूरदर्शी बयान दिया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य देश की विनिर्माण क्षमताओं को इस स्तर पर ले जाना है कि भारत वैश्विक बाजार में एक मजबूत और विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी पहचान बना सके। इस दिशा में विभिन्न नई नीतियों और योजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है, जिससे न केवल घरेलू मांग पूरी होगी बल्कि दुनिया भर के देशों को यहां से उत्पाद निर्यात किए जा सकेंगे।

वैश्विक निवेशकों के लिए बढ़ रहा आकर्षण

पिछले कुछ वर्षों में भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जबरदस्त रुचि देखने को मिली है। दुनिया भर की दिग्गज कंपनियां भारत को अपने उत्पादन का मुख्य आधार बनाने पर विचार कर रही हैं। इसके पीछे कुशल श्रम बल, सरकार द्वारा दी जा रही आकर्षक प्रोत्साहन योजनाएं (पीएलआई) और देश का विशाल घरेलू बाजार मुख्य वजहें हैं। सरकार का यह प्रयास है कि आपूर्ति श्रृंखला को और अधिक मजबूत किया जाए ताकि वैश्विक स्तर पर किसी भी प्रकार की बाधा आने पर भारत एक सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प के रूप में उभर सके।

रोजगार सृजन और तकनीकी विकास

इस महत्वाकांक्षी विजन के धरातल पर उतरने से देश के युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रमों को भी इसी विजन के अनुरूप ढाला जा रहा है ताकि आने वाले समय में उद्योगों की मांग के अनुसार कुशल पेशेवर आसानी से उपलब्ध हो सकें। अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि केवल असेंबलिंग ही नहीं, बल्कि उच्च कोटि की डिजाइनिंग और निर्माण का काम भी पूरी तरह से देश के भीतर ही किया जा सके।

भविष्य की रूपरेखा और चुनौतियां

हालांकि इस लक्ष्य को हासिल करने के मार्ग में कुछ वैश्विक चुनौतियां भी हैं, लेकिन सरकार की स्पष्ट नीतियों और समयबद्ध क्रियान्वयन से उन पर पार पाने की पूरी कोशिश की जा रही है। बुनियादी ढांचे के विकास, लॉजिस्टिक्स को सुगम बनाने और अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल करने के लिए निरंतर सुधार किए जा रहे हैं। आने वाले वर्षों में देश का यह विजन न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नई गति देगा, बल्कि वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मानचित्र पर भारत को एक सिरमौर के रूप में स्थापित करने में भी मील का पत्थर साबित होगा।
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