पुणे महानगर क्षेत्र परिवहन निगम लिमिटेड ने आज देश की पहली पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित हाइड्रोजन फ्यूल सेल बस के कमर्शियल ट्रायल की शुरुआत की है। पारंपरिक डीजल और सीएनजी बसों के विकल्प के रूप में आई यह तकनीक पर्यावरण के लिहाज से बेहद खास मानी जा रही है क्योंकि इसके संचालन से केवल जलवाष्प का उत्सर्जन होता है, जिससे किसी भी प्रकार का वायु प्रदूषण नहीं फैलता। वाहन निर्माताओं और वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थानों के संयुक्त प्रयासों से तैयार इन बसों में लंबी दूरी तय करने की क्षमता है और इन्हें चार्ज करने में भी बहुत कम समय लगता है।
सार्वजनिक परिवहन में क्रांतिकारी बदलाव इस ट्रायल के पहले चरण में इन बसों को चुनिंदा शहरी मार्गों पर चलाया जा रहा है जहां यात्रियों की संख्या अत्यधिक होती है। परिवहन विशेषज्ञों और इंजीनियरों की एक विशेष टीम बस के प्रदर्शन, ईंधन दक्षता और विभिन्न सड़क परिस्थितियों में इसकी स्थिरता का बारीकी से अध्ययन कर रही है। शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि इस तकनीक की रनिंग कॉस्ट भविष्य में पारंपरिक ईंधनों की तुलना में काफी कम हो सकती है, जिससे सार्वजनिक परिवहन ऑपरेटरों को भारी आर्थिक लाभ मिल सकता है। नगर निगम प्रशासन ने इस पहल की सराहना करते हुए आने वाले वर्षों में अपने बेड़े में ऐसी और अधिक बसों को शामिल करने की मंशा जताई है।
बुनियादी ढांचे का विकास और चुनौतियां हाइड्रोजन आधारित वाहनों के व्यापक उपयोग के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता पर्याप्त रीफ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की है। इस दिशा में सरकार ने प्रमुख तेल विपणन कंपनियों के साथ मिलकर शहर के विभिन्न हिस्सों में हाइड्रोजन वितरण और फिलिंग स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। सुरक्षा मानकों को सर्वोपरि रखते हुए सभी आवश्यक अनुपालन सुनिश्चित किए गए हैं। ऑटोमोबाइल जानकारों का मानना है कि यदि यह ट्रायल सफल रहता है, तो भारत जल्द ही वैश्विक स्तर पर ग्रीन मोबिलिटी सॉल्यूशंस के क्षेत्र में एक अग्रणी देश के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेगा।