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तकनीक का विवेक: एआई के इस दौर में विद्यार्थियों के मार्गदर्शक बनें शिक्षक, राज्यपाल डेका का निर्देश
छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को लेकर राज्यपाल डेका ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जिसमें उन्होंने शिक्षकों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस आधुनिक दौर में छात्रों को सही राह दिखाने की अपील की है।
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Ankit Yadav
06 सित 2026, 11:54
आज के इस अत्याधुनिक और तेजी से बदलते हुए डिजिटल दौर में शिक्षा प्रणाली के समक्ष कई नए अवसर और चुनौतियां एक साथ खड़ी हो चुकी हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई हमारे दैनिक जीवन और पठन-पाठन की शैलियों में तेजी से अपनी जड़ें जमा रहा है। इसी संदर्भ को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ के राज्यपाल डेका ने एक अहम बयान जारी किया है, जिसमें उन्होंने शिक्षण समुदाय का आह्वान किया है कि वे तकनीक की इस दौड़ में केवल मूक दर्शक न बनें, बल्कि अपने विद्यार्थियों के सच्चे और सशक्त मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं। उनका मानना है कि शिक्षकों का यह प्राथमिक दायित्व बनता है कि वे छात्र-छात्राओं को आधुनिक तकनीक के विवेकपूर्ण और संतुलित उपयोग का पाठ पढ़ाएं, ताकि युवा पीढ़ी तकनीक की आदि बनने के बजाय उसका रचनात्मक और सकारात्मक दोहन करना सीख सके।
शिक्षा और तकनीक का समन्वय
राज्यपाल के इस संदेश का मुख्य निहितार्थ यह है कि आधुनिक नवाचार और मानवीय मार्गदर्शन का एक बेहतर संतुलन ही भविष्य की मजबूत पीढ़ी तैयार कर सकता है। आज के समय में इंटरनेट और एआई आधारित टूल्स विद्यार्थियों को असीमित जानकारी तो उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन उस जानकारी में से सही क्या है और गलत क्या है, इसका भेद करना सिखाना केवल एक अनुभवी शिक्षक के ही वश में है। यदि शिक्षण संस्थानों में आधुनिक तकनीक का प्रयोग बिना किसी उचित दिशा-निर्देश के होने लगे, तो इसके नकारात्मक परिणाम भी सामने आ सकते हैं। इसलिए यह बेहद जरूरी हो जाता है कि शिक्षक आगे आएं और छात्रों को यह समझाएं कि किस प्रकार तकनीक का इस्तेमाल उनकी वैचारिक क्षमता और सृजनात्मकता को बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए, न कि उनकी बौद्धिक क्षमताओं को कमजोर करने के लिए।
इस दिशा में देश और दुनिया भर के शैक्षणिक संस्थानों में भी लगातार मंथन चल रहा है कि पाठ्यक्रम के भीतर डिजिटल साक्षरता के साथ-साथ नैतिक मूल्यों का समावेश कैसे किया जाए। छत्तीसगढ़ के परिप्रेक्ष्य में बात करें तो दूरदराज के इलाकों तक आधुनिक शिक्षा पहुंचाने के प्रयासों के बीच यह बात और भी अधिक प्रासंगिक हो जाती है कि छात्र तकनीक के फेर में पड़कर अपनी मौलिक सोच से दूर न हों। राज्यपाल द्वारा दी गई यह सीख इस बात पर जोर देती है कि मशीनों और एल्गोरिदम्स की कितनी भी तरक्की क्यों न हो जाए, एक अच्छे गुरु द्वारा दिया गया मानवीय स्पर्श, नैतिक शिक्षा और संबल हमेशा अपरिहार्य बना रहेगा।
भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए स्कूलों और कॉलेजों को अपनी शिक्षण पद्धतियों में जरूरी बदलाव करने होंगे। आने वाले दिनों में यह उम्मीद की जा रही है कि राज्य के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में इस दिशा में विशेष सत्र, कार्यशालाएं और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे शिक्षकों और छात्रों दोनों को ही एआई के नैतिक और व्यावहारिक पहलुओं से भली-भांति अवगत कराया जा सके। शिक्षाविदों ने भी राज्यपाल के इस बयान का स्वागत करते हुए कहा है कि तकनीक को कक्षा का दुश्मन नहीं बल्कि उसका एक सहायक उपकरण बनाना ही असली बुद्धिमत्ता है, और शिक्षक ही इस बदलाव की धुरी हैं जो समाज को एक सही दिशा दिखा सकते हैं।