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कृषि

आधुनिक तकनीक अपनाई: मंडी धनौरा में हार्वेस्टर से ट्रेंच गन्ने की कटाई को तैयार हुए किसान

मंडी धनौरा क्षेत्र में गन्ने की खेती से जुड़े किसानों ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हार्वेस्टर के माध्यम से ट्रेंच विधि से बोए गए गन्ने की कटाई कराने पर सहमति जताई है, जिससे खेती की लागत और समय दोनों में भारी कमी आने की उम्मीद है।

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Ankit Yadav
25 अग 2026, 16:21
आधुनिक तकनीक अपनाई: मंडी धनौरा में हार्वेस्टर से ट्रेंच गन्ने की कटाई को तैयार हुए किसान
उत्तर प्रदेश के कृषि क्षेत्रों में लगातार आ रहे बदलाव के बीच मंडी धनौरा से एक सकारात्मक खबर सामने आई है। यहां के स्थानीय किसानों ने गन्ना विभाग के मार्गदर्शन और प्रशासनिक प्रयासों के बाद अपनी पारंपरिक कृषि पद्धतियों में सुधार करने का मन बना लिया है। किसान अब अपने खेतों में आधुनिक हार्वेस्टर मशीनों का उपयोग करके ट्रेंच विधि से तैयार गन्ने की कटाई करवाने के लिए पूरी तरह सहमत हो गए हैं। इस निर्णय से कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण को एक नया बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

समय और लागत में भारी बचत

पारंपरिक रूप से गन्ने की कटाई एक बेहद श्रमसाध्य और समय लेने वाला कार्य माना जाता रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में मजदूरों की आवश्यकता होती है और खर्च भी काफी अधिक आता है। गन्ना विभाग द्वारा किसानों को लगातार यह समझाया जा रहा था कि यदि वे हार्वेस्टर जैसी आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल करते हैं, तो फसलों की कटाई तय समय से बहुत पहले पूरी हो जाएगी। इससे न केवल मजदूरी पर होने वाले भारी खर्च से राहत मिलेगी, बल्कि किसानों का बहुमूल्य समय भी बचेगा, जिसका उपयोग वे अपने अन्य कृषि कार्यों को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में कर सकेंगे। आधुनिक तकनीक के प्रयोग से खेतों को अगली फसल के लिए तैयार करने में भी कम समय लगेगा। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के कदमों से किसानों की कुल आय में सुधार होगा क्योंकि उत्पादन लागत में सीधे तौर पर कमी आएगी। ट्रेंच विधि से गन्ने की बुवाई अपने आप में एक उन्नत तरीका है, जो पौधों को उचित दूरी और पर्याप्त धूप प्रदान करता है, और अब हार्वेस्टर के उपयोग से इसकी कटाई का चक्र भी पूरी तरह से सुव्यवस्थित हो जाएगा।

विभाग का सहयोग और आगे की राह

गन्ने की खेती से जुड़े अधिकारियों और मैदानी अमले ने किसानों के साथ लगातार संवाद स्थापित किया, जिसके परिणामस्वरूप यह आम सहमति बन पाई है। विभाग की ओर से किसानों को आधुनिक उपकरणों के रख-रखाव और उनके सही इस्तेमाल के संबंध में भी आवश्यक जानकारियां दी जा रही हैं ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी असुविधा से बचा जा सके। आने वाले दिनों में इस पहल के सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं, जिससे क्षेत्र के अन्य किसान भी प्रेरित होकर मशीनीकरण की तरफ रुख करेंगे।
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