आनंद बाग में बदला दौर
कानपुर की सड़कों पर बुधवार को एक अलग ही नजारा देखने को मिला जब आनंद बाग चौराहे का कायाकल्प एक पुराने दौर के फिल्म सेट में हो गया। निर्देशक सुधीर मिश्रा की फिल्म गांधी माय मदर की शूटिंग के लिए इस स्थान को चुना गया ताकि 80 के दशक और आजादी के आसपास के माहौल को सटीक रूप से जीवंत किया जा सके। चौराहे पर मौजूद पुराने मकानों की बनावट ने इस पूरे दृश्य को और भी प्रामाणिक बना दिया। शूटिंग के दौरान सड़क पर पुरानी शैली की जीपें और आजादी से पहले के दौर की विंटेज कारें दौड़ती नजर आईं। इन ऐतिहासिक गाड़ियों और पुरानी वेशभूषा को देखकर स्थानीय लोगों को लगा जैसे शहर कई दशक पीछे चला गया हो। चारों तरफ लाइट और कैमरे के साथ धुएं से भरा माहौल ऐसा लग रहा था मानो किसी बड़े फिल्म सेट का निर्माण किया गया हो। फिल्म के दृश्यों को परफेक्ट बनाने के लिए निर्देशक सुधीर मिश्रा की निगरानी में बारीकी से काम किया गया।
तनावपूर्ण दृश्य और विशेष सेट
फिल्म में दंगे और तनाव के सीन को पर्दे पर उतारने के लिए आनंद बाग चौराहे पर एक विशेष सेट तैयार किया गया था। सड़क के किनारों पर जगह-जगह कपड़ों में आग लगाकर दृश्य को बेहद सजीव और संजीदा बनाने की कोशिश की गई। स्मोक मशीनों का इस्तेमाल करके पूरे इलाके को गहरे धुएं में तब्दील कर दिया गया, जिसके बीच कलाकार भागते हुए नजर आए। हर एक शॉट को बेहतरीन बनाने के लिए निर्देशक सुधीर मिश्रा ने कई बार री-टेक लिए और परफेक्ट होने के बाद ही उसे ओके किया। मनोज बाजपेयी इस फिल्म में बापू की भूमिका में नजर आ रहे हैं और उन्होंने इस किरदार के लिए सादगी भरा गेटअप अपनाया है। जब प्रशंसकों को पता चला कि उनके पसंदीदा अभिनेता शूटिंग कर रहे हैं, तो वहां भारी भीड़ जमा हो गई। प्रशंसकों की भीड़ को देखते हुए फिल्म सेट पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, ताकि शूटिंग का काम बिना किसी बाधा के पूरा किया जा सके।
शूटिंग का उत्साह और शेड्यूल
कानपुर के आनंद बाग चौराहे पर शुरू हुई इस शूटिंग ने शहर के सिनेमाप्रेमियों में खासा उत्साह पैदा कर दिया है। बापू के सादगी भरे लुक में मनोज बाजपेयी को अपने सामने देखकर प्रशंसक काफी रोमांचित दिखे। भीड़ दूर से ही अपने प्रिय अभिनेता के अभिनय को देखकर तालियां बजाती रही और उनकी तस्वीरें अपने कैमरों में कैद करती दिखाई दी। फिल्म का यह शूटिंग शेड्यूल कुल तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें अलग-अलग दृश्यों को फिल्माया जाएगा। निर्देशक सुधीर मिश्रा की इस फिल्म के माध्यम से कानपुर के कई पुराने इलाकों का इस्तेमाल ऐतिहासिक दृश्यों को प्रामाणिक बनाने के लिए किया जा रहा है। शूटिंग के पहले दिन से ही कलाकारों और क्रू मेंबर्स की कड़ी मेहनत ने पूरे चौराहे के माहौल को बदल दिया है। स्थानीय निवासियों के लिए यह एक अनोखा अनुभव रहा क्योंकि उन्होंने पहली बार अपने सामने इस तरह की भव्य फिल्मी शूटिंग होते हुए देखा। भविष्य में इस शेड्यूल के दौरान और भी कई महत्वपूर्ण दृश्य फिल्माए जाने की उम्मीद है।