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नेटवर्क संकट: लखनऊ के गांवों में गायब हुआ जियो का 4G और 5G सिग्नल

लखनऊ के कई ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की भारी समस्या उत्पन्न हो गई है। लोग कॉलिंग और इंटरनेट सेवाओं के पूरी तरह बाधित होने से बेहद परेशान हैं।

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Ankit Yadav
21 सित 2026, 11:53
नेटवर्क संकट: लखनऊ के गांवों में गायब हुआ जियो का 4G और 5G सिग्नल

ग्रामीण इलाकों में गहराया नेटवर्क संकट उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अंतर्गत आने वाले तमाम ग्रामीण अंचलों में दूरसंचार सेवा प्रदाता जियो का नेटवर्क पूरी तरह चरमरा गया है, जिससे स्थानीय निवासियों को भयंकर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि लोगों के मोबाइल फोन पर आधुनिक और तीव्र गति वाली 5G सेवा तो बहुत दूर की बात है, बल्कि सामान्य और बुनियादी 4G इंटरनेट कनेक्टिविटी भी सुचारू रूप से काम नहीं कर रही है। स्थिति यह है कि इंटरनेट डेटा पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है और साधारण कॉलिंग के दौरान भी बार-बार फोन कटने या आवाज न आने जैसी गंभीर समस्याएं लगातार बनी हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों, विद्यार्थियों और छोटे व्यापारियों के लिए इस तरह की तकनीकी बाधा ने रोजमर्रा के जीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में अपने सगे-सम्बन्धियों से संपर्क साधना भी इन दिनों एक बहुत बड़ी चुनौती बन चुका है, क्योंकि मोबाइल के सिग्नल टॉवर पूरी तरह धोखा दे रहे हैं और लोग बार-बार नेटवर्क तलाशने के लिए मजबूर हो रहे हैं।

डिजिटल व्यवस्था और संपर्कों पर मंडराया ग्रहण आज के इस आधुनिक दौर में जहां हर छोटा-बड़ा काम डिजिटल माध्यमों और ऑनलाइन भुगतानों के जरिए संचालित होता है, ऐसे समय में लखनऊ के इन गांवों में नेटवर्क का गायब होना एक बड़ी विफलता को दर्शाता है। संचार माध्यमों की इस बदहाली के कारण छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है, तो वहीं दूसरी ओर ग्रामीण बाजारों में डिजिटल लेनदेन करने वाले दुकानदारों को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जब भी किसी इलाके में इस प्रकार की तकनीकी समस्याएं लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो यह सीधे तौर पर टेलीकॉम कंपनियों की लचर व्यवस्था और बुनियादी ढांचे की कमी को उजागर करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल टावरों की कम संख्या और समय पर उनके रख-रखाव न होने की वजह से अक्सर उपभोक्ताओं को इस प्रकार की अड़चनों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार इस मुद्दे पर अपनी शिकायतें दर्ज कराने का प्रयास किया है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है और किसी भी प्रकार का सकारात्मक बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है, जिससे जनता में रोष व्याप्त है।

त्वरित समाधान की मांग और भविष्य की राह इस विकट परिस्थिति से निजात पाने के लिए ग्रामीण अब लामबंद होकर संबंधित मोबाइल कंपनी और प्रशासनिक अधिकारियों से शीघ्र अति शीघ्र ठोस कदम उठाने की पुरजोर मांग कर रहे हैं। जनता का स्पष्ट कहना है कि यदि जल्द से जल्द इन क्षेत्रों में सिग्नल की गुणवत्ता को सुधारा नहीं गया और तकनीकी खामियों को दूर नहीं किया गया, तो उन्हें सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। कंपनी के तकनीकी विशेषज्ञों और इंजीनियरों की टीम को तुरंत इन ग्रामीण इलाकों का दौरा करके खराब पड़े टावरों की मरम्मत करनी चाहिए ताकि इंटरनेट और कॉलिंग की सेवाएं फिर से बहाल हो सकें। इस प्रकार के मामलों में दूर संचार नियामक प्राधिकरण को भी स्वतः संज्ञान लेकर कंपनियों की जवाबदेही तय करनी चाहिए ताकि उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन न हो सके। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी इस गंभीर संकट का समाधान कितनी जल्दी निकालती है और ग्रामीण जनता को इस डिजिटल अंधकार से कब मुक्ति मिलती है।

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