बेरीनाग में फिल्म पायर का सफल प्रदर्शन
उत्तराखंड के बेरीनाग स्थित जीआईसी मैदान में मोबाइल थिएटर के माध्यम से पायर फिल्म का विशेष प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस फिल्म के तीनों निर्धारित शो हाउसफुल रहे, जिसमें दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी। बुधवार की सुबह से ही स्थानीय लोग अपने क्षेत्र में बड़े पर्दे पर इस फिल्म को देखने के लिए बड़ी संख्या में एकत्र हुए थे। इस आयोजन में विधायक फकीर राम टम्टा, ब्लॉक प्रमुख संगीता चन्याल, नगर पालिका अध्यक्ष हेमा पंत के साथ व्यापार संघ के मुखिया राजेश रावत समेत कई विशिष्ट व्यक्ति उपस्थित रहे। निर्देशक विनोद कापड़ी, सहायक निर्देशक दिव्यांशु राठौर तथा फिल्म के मुख्य कलाकार पदम सिंह कापड़ी और हीरा देवी भी मौके पर मौजूद थे। दर्शकों के बीच इस फिल्म को लेकर काफी उत्साह देखा गया और वे कलाकारों के साथ सेल्फी लेते हुए नजर आए। बेरीनाग के अलावा आसपास के क्षेत्रों जैसे गंगोलीहाट, सेराघाट, थल और चौड़मन्या से भी भारी संख्या में दर्शक इस कहानी को देखने पहुंचे थे।
बुजुर्ग कलाकारों का अभिनय और दर्शकों की प्रतिक्रिया
फिल्म के मुख्य कलाकार पदम सिंह कापड़ी एक सेवानिवृत्त फौजी हैं, जिन्होंने पहली बार कैमरे के सामने काम किया है। उन्होंने बताया कि अभिनय के दौरान फौज के अनुशासन और माता-पिता से मिले संस्कारों ने उनके किरदार को जीवंत करने में बहुत मदद की। फिल्म की दूसरी मुख्य कलाकार हीरा देवी को निर्देशक ने तब खोजा था, जब वे जंगल में लकड़ी काट रही थीं। हीरा देवी ने दर्शकों से मिल रहे अपार स्नेह पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए नई पीढ़ी को माता-पिता की देखभाल करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को यह समझना चाहिए कि जब वे रोजगार के लिए घर से बाहर जाते हैं, तो पीछे छूटे माता-पिता किस प्रकार की मानसिक और शारीरिक तकलीफों से गुजरते हैं। पदम सिंह कापड़ी का सहज अभिनय और हीरा देवी की भावुक अपील ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मोबाइल थिएटर के जरिए बड़े पर्दे का अनुभव मिलना उनके लिए बेहद सराहनीय है।
फिल्म की कहानी और पलायन का मार्मिक पक्ष
फिल्म पायर की कहानी कुमाऊं के एक वीरान होते गांव के 80 वर्षीय बुजुर्ग दंपती के जीवन पर आधारित है। उनका बेटा रोजगार के लिए कई वर्ष पहले चला गया था, जिसके बाद से वे अकेले रह गए। बीमारी और अकेलेपन के बीच दंपती को सबसे ज्यादा डर अपनी मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार के समय का सताता है। इस अनिश्चितता के कारण वे अपनी मौत से पहले ही चिता बनाने की योजना बनाने लगते हैं। निर्देशक विनोद कापड़ी को यह कहानी वर्ष 2017 में एक बुजुर्ग दंपती के संघर्ष को देखकर सूझी थी। फिल्म पहाड़ में स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव और अपनों की प्रतीक्षा में बिताए जा रहे अकेले जीवन की सच्चाई को सामने रखती है। 30 अक्टूबर को यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इससे पहले इसे श्रीनगर और बागेश्वर में भी दिखाया जा रहा है। 25 साल पहले पैदल सफर करने वाले निर्देशक के लिए अपनी फिल्म को बेरीनाग में दिखाना एक भावनात्मक उपलब्धि के समान है।