रिलीज के शुरुआती दिनों में खाली पड़े रहे थिएटर्स
शेखर कपूर के निर्देशन में बनी फिल्म मासूम को आज हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय और आइकॉनिक मूवीज के तौर पर जाना जाता है। लेकिन जिस समय यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, तब इसे शुरुआत में बिल्कुल भी दर्शक नहीं मिले थे। हालात ऐसे थे कि रिलीज के बाद शुरुआती 6 दिनों तक कोई भी शख्स इस फिल्म को देखने के लिए सिनेमाघरों में नहीं पहुंचा था। स्थिति इतनी गंभीर थी कि पहले दिन इसे देखने के लिए एक भी दर्शक नहीं आया था और लगातार छह दिनों तक थिएटर्स एकदम खाली पड़े रहे थे। इस शुरुआती नाकामी की वजह से फिल्म के निर्माताओं और वितरकों के बीच भारी चिंता का माहौल बन गया था। डिस्ट्रीब्यूटर्स लगातार फोन करके फिल्म को सिनेमाघरों से उतारने की बात कह रहे थे क्योंकि थिएटर्स में सन्नाटा पसरा हुआ था और शो चलाने का कोई फायदा नजर नहीं आ रहा था। किसी ने भी यह कल्पना नहीं की थी कि शुरुआत में पूरी तरह फ्लॉप साबित होने वाली यह फिल्म आने वाले दिनों में इतिहास रच देगी और दर्शकों के दिलों पर राज करेगी।
टिकट ब्लैक करने वालों और डिस्ट्रीब्यूटर्स की बड़ी तैयारी
फिल्म के रिलीज होने से पहले इसे लेकर काफी ज्यादा उत्साह और उम्मीदें थीं। इस फिल्म को अपनी पहली फिल्म के तौर पर लेकर लोग काफी ज्यादा उत्साहित थे और इसके सफल होने की पूरी उम्मीद की जा रही थी। फिल्म की सफलता सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर पहले से ही तैयारियां की गई थीं। डिस्ट्रीब्यूटर्स से भी इस सिलसिले में बड़े पैमाने पर तैयारियां करने के लिए कहा गया था ताकि दर्शकों को किसी भी तरह की परेशानी न हो। इसके अलावा टिकट ब्लैक करने वालों को भी विशेष रूप से निर्देश दिए गए थे और उन्हें एक्स्ट्रा टिकट खरीदने के लिए कहा गया था ताकि बाजार में फिल्म की मांग का माहौल बना रहे। लेकिन जब फिल्म पर्दे पर आई तो स्थिति पूरी तरह से उलट गई और सारी योजनाएं धरी की धरी रह गई। शुरुआत में दर्शकों के न आने की वजह से सभी की उम्मीदों पर पानी फेर गया था और डिस्ट्रीब्यूटर्स ने निराशा जताते हुए फिल्म को हॉल से हटाने के निर्देश देने शुरू कर दिए थे। हालांकि इस शुरुआती झटके के बाद जो बदलाव आया उसने सभी को हैरान कर दिया।
सातवें दिन का चमत्कार और दूसरे वीकेंड में हाउसफुल शोज
शुरुआती छह दिनों तक दर्शकों के लिए तरसने वाली इस फिल्म के भाग्य में सातवें दिन एक बड़ा चमत्कार लिखा हुआ था। जैसे ही रिलीज का सातवां दिन आया, अचानक से सिनेमाघरों के बाहर लोगों की भीड़ जुटने लगी और दर्शक सिनेमाघरों तक पहुंचने लगे। यह बदलाव बेहद आश्चर्यजनक था क्योंकि महज एक दिन पहले तक थिएटर्स पूरी तरह खाली पड़े थे। सातवें दिन से शुरू हुआ यह सिलसिला थमता नहीं देखा गया और देखते ही देखते माहौल पूरी तरह बदल गया। दूसरे वीकेंड तक आते-आते स्थिति यह हो गई कि मासूम फिल्म के सभी शोज हाउसफुल हो गए और सिनेमाघरों में टिकट के लिए मारामारी मच गई। इस तरह से पहले सप्ताह में बॉक्स ऑफिस पर पूरी तरह फ्लॉप रहने वाली फिल्म ने एक चमत्कारी तरीके से शानदार वापसी की थी। सिनेमा जगत के इतिहास में यह घटना एक अनोखी मिसाल बन गई कि कैसे खराब शुरुआत के बाद भी बेहतरीन गुणवत्ता वाली फिल्में दर्शकों का दिल जीत सकती हैं और हिंदी सिनेमा की सबसे आइकॉनिक मूवी बनकर उभर सकती हैं।