फिल्म शूटिंग के लिए पहुंची विंटेज कार
फिल्म निर्माताओं और क्रू मेंबरों द्वारा आने वाले दृश्यों को जीवंत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में गांधी एंड माय मदर फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में एक पुरानी शैली की मॉरिस माइनर कार को विशेष तौर पर लखनऊ से मंगवाया गया है। इस वाहन के शूटिंग लोकेशन पर पहुंचते ही सेट पर काम कर रहे लोगों में उत्साह का माहौल बन गया। निर्देशकों और प्रोडक्शन टीम की योजना इस वाहन का उपयोग ऐतिहासिक कालखंड को पर्दे पर उतारने के लिए करने की है। फिल्म निर्माण से जुड़े तमाम अधिकारी और तकनीशियन शूटिंग से जुड़ी अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। स्थानीय स्तर पर इस वाहन के पहुंचने से फिल्म की कहानी और उसके परिवेश को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कार के बाहरी स्वरूप और उसकी बेहतरीन बनावट को देखने के लिए शूटिंग स्थल के आसपास कई लोग उत्सुकता से खड़े दिखाई दिए। प्रोडक्शन हाउस ने सुरक्षा और सुचारू रूप से कार्य संचालन के लिए कई स्थानीय स्तर पर प्रबंध भी किए हैं ताकि फिल्मांकन का काम बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सके और तय शेड्यूल के अनुसार सभी सीन समय पर शूट किए जा सकें।
कानपुर में मशाल थामे दंगाईयों के दृश्य
फिल्म की पटकथा और उसकी डिमांड के अनुसार विभिन्न दृश्यों को शूट करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। जानकारी के अनुसार कानपुर में हाथों में मशाल थामे कुछ लोगों को दौड़ते हुए फिल्माने की विशेष योजना पर काम चल रहा है। इस प्रकार के दृश्य फिल्म की कहानी में एक खास मोड़ या तनावपूर्ण स्थिति को दर्शाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। कलाकरों और जूनियर कलाकारों को इन विशेष दृश्यों को फिल्माने के लिए पिछले कई दिनों से रिहर्सल करवाई जा रही है। निर्देशक यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हर एक शॉट में प्रामाणिकता दिखे और दर्शकों को स्क्रीन पर इतिहास का वह दौर बिल्कुल वास्तविक लगे। शूटिंग के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके और कलाकारों को अपने संवाद तथा एक्शन सीक्वेंस शूट करने में पूरी आसानी हो। फिल्म यूनिट से जुड़े सदस्यों ने बताया कि आने वाले दिनों में और भी कई बड़े कलाकारों के सेट पर पहुंचने की संभावना है। इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट को लेकर फिल्म जगत के गलियारों में भी काफी हलचल है और हर कोई इसके अंतिम परिणाम को पर्दे पर देखने के लिए बेहद उत्सुक नजर आ रहा है।
फिल्म निर्माण और उसका महत्व
किसी भी ऐतिहासिक या संवेदनशील विषय पर आधारित फिल्म का निर्माण करना अपने आप में एक बहुत बड़ी चुनौती होता है। गांधी एंड माय मदर जैसी परियोजनाओं के माध्यम से युवा पीढ़ी को देश के अतीत और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं से रूबरू कराने का अवसर मिलता है। जब इस तरह की फिल्मों की शूटिंग किसी शहर में होती है तो वहां के स्थानीय कलाकारों और कामगारों को भी रोजगार के नए अवसर मिलते हैं। इसके अलावा पर्यटन और स्थानीय संस्कृति को भी राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी पहचान मिलने का मौका प्राप्त होता है। फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की कलात्मक और वैचारिक फिल्में समाज में सकारात्मक संदेश देने का काम करती हैं। आने वाले समय में जैसे-जैसे शूटिंग के चरण आगे बढ़ेंगे, इस प्रोजेक्ट से जुड़ी और भी कई दिलचस्प जानकारियां सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल प्रोडक्शन टीम का पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ अपनी तय समय सीमा के भीतर सभी महत्वपूर्ण दृश्यों को उच्च गुणवत्ता के साथ फिल्माने पर केंद्रित है ताकि दर्शकों को सिनेमाघरों में एक बेहतरीन और यादगार दृश्य अनुभव प्रदान किया जा सके।