गौरव देवासी ने उठाया बड़ा सवाल
बॉलीवुड अभिनेता गौरव देवासी ने हाल ही में राजस्थानी सिनेमा के विकास और उसकी वर्तमान स्थिति को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब देश के विभिन्न क्षेत्रीय सिनेमा अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं और वैश्विक स्तर पर अपनी एक अलग छाप छोड़ रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हमारे पास संस्कृति की कोई कमी नहीं है और हमारे पास कहानियों का असीम भंडार मौजूद है। इसके बावजूद हमारा स्थानीय सिनेमा उस मुकाम को हासिल नहीं कर पाया है जिसका वह असल में हकदार था। उनके इस बयान ने फिल्म जगत से जुड़े तमाम कलाकारों और निर्देशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। लोग अब इस बात पर विचार कर रहे हैं कि आखिर वे कौन सी कमियां हैं जिनके कारण हमारी संस्कृति फिल्मों के पर्दे पर उतनी मजबूती से नहीं उभर पाई जितनी उभरनी चाहिए थी। उनके इस कदम से क्षेत्रीय कला प्रेमियों में एक नई उम्मीद जगी है कि अब इस दिशा में गंभीर प्रयास किए जाएंगे।
समृद्ध संस्कृति और फिल्मों का अंतर
राजस्थानी संस्कृति अपनी लोक कला, संगीत, वेशभूषा और ऐतिहासिक धरोहर के लिए पूरी दुनिया में अपनी एक विशेष पहचान रखती है। यहां की हर एक परंपरा में एक अनूठी कहानी छिपी हुई है जो किसी भी बड़े पर्दे की फिल्म को सफल बनाने के लिए पूरी तरह से सक्षम मानी जाती है। इसके बावजूद जब बात व्यावसायिक सिनेमा और बड़े बजट की फिल्मों की आती है तो यह क्षेत्र अन्य राज्यों के मुकाबले काफी पीछे नजर आता है। अभिनेता गौरव देवासी ने इसी अंतर को गहराई से समझाते हुए यह सवाल उठाया है कि इतनी विविधता होने के बावजूद हमारे यहां फिल्में उस स्तर तक क्यों नहीं पहुंच पा रही हैं। इस विषय पर कई जानकारों का मानना है कि आधुनिक तकनीक की कमी और वित्तीय सहायता का अभाव इसके मुख्य कारणों में शामिल हो सकता है। जब तक स्थानीय स्तर पर कलाकारों को उचित मंच और बड़ा आर्थिक सहयोग नहीं मिलेगा तब तक इस स्थिति में सुधार होना बहुत कठिन हो जाएगा। दर्शकों का एक बड़ा वर्ग भी आज अच्छी कहानियों वाली क्षेत्रीय फिल्मों को देखना पसंद करता है लेकिन निर्माताओं की उदासीनता इसमें सबसे बड़ा अवरोध बनी हुई है।
सिनेमा के विकास की आगे की राह
किसी भी क्षेत्र की भाषा और संस्कृति को जीवित रखने और उसे आगे बढ़ाने में सिनेमा का माध्यम सबसे अधिक प्रभावशाली और सशक्त माना जाता है। दक्षिण भारत और पंजाब के क्षेत्रीय सिनेमा ने अपनी संस्कृति को जिस प्रकार बड़े पर्दे पर पेश किया है उससे आज पूरा देश प्रभावित हो रहा है। राजस्थानी सिनेमा को भी उसी तर्ज पर आधुनिक समय की मांग के अनुसार खुद को ढालने की सख्त जरूरत है। जब तक फिल्मों की गुणवत्ता और उनके प्रचार-प्रसार पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाएगा तब तक वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान नहीं बना पाएंगी। गौरव देवासी जैसी जानी-मानी हस्तियों के मुख से ऐसी बातें उठने से अब इस उद्योग से जुड़े लोगों को आत्मમंथन करने का पूरा अवसर मिल रहा है। आने वाले समय में यदि सरकार और बड़े निवेशक मिलकर इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाते हैं तो स्थितियां बदल सकती हैं। दर्शकों और कलाकारों को मिलकर राजस्थानी कला को उसका खोया हुआ गौरव वापस दिलाने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।