गीत से जुड़े मुख्य तथ्य और पहनावे का ब्यौरा
सिनेमा जगत के इतिहास में कई ऐसे गाने दर्ज हैं जो अपने अनोखे अंदाज के कारण हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं। ऐसा ही एक प्रसिद्ध नब्बे के दशक का गाना रवीना टंडन और सुनील शेट्टी पर फिल्माया गया था जो आज भी संगीत प्रेमियों के बीच खासा लोकप्रिय है। इस लोकप्रिय गीत को रिलीज हुए लगभग तीस साल का लंबा समय बीत चुका है लेकिन इसकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। इस गाने की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसमें मुख्य अभिनेत्री रवीना टंडन ने एक या दो नहीं बल्कि कुल दस अलग-अलग प्रकार की वेशभूषा या कॉस्ट्यूम पहने थे। हर दृश्य में अभिनेत्री का नया और आकर्षक रूप देखने को मिलता है जो उस दौर के फैशन के हिसाब से काफी नया और अनोखा माना गया था। दूसरी तरफ मुख्य अभिनेता सुनील शेट्टी को इस पूरे गाने के दौरान केवल एक ही ड्रेस या लिबास में देखा गया था। अभिनेता को दूसरा ड्रेस पहनने का मौका या सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ था जो इस गाने से जुड़ी एक बहुत ही दिलचस्प और अनोखी बात है। इस तरह के प्रयोग उस समय के गानों में बहुत कम देखने को मिलते थे जहाँ अभिनेत्री को बार-बार नए रूप में और अभिनेता को एक ही रूप में पर्दे पर दिखाया जाता था।
संगीत और गायकों की भूमिका का विशेष महत्व
किसी भी गाने की सफलता में उसके संगीत और मुख्य गायकों की आवाज का बहुत बड़ा और अहम योगदान होता है। इस लोकप्रिय गाने को अपनी जादुई और सुरीली आवाजों से सजाने वाले दो जाने-माने पार्श्व गायक अभिजीत भट्टाचार्य और चंदना थे। इन दोनों की बेहतरीन और दिल को छू लेने वाली गायकी ने इस गीत में जान फूंक दी थी और इसे हमेशा के लिए यादगार बना दिया था। अभिजीत और चंदना की जुगलबंदी ने श्रोताओं के दिलों पर एक गहरी छाप छोड़ी थी। जब भी यह गाना किसी भी मंच पर या रेडियो और टेलीविजन पर बजता है, तो आज के दौर के लोग भी खुद को झूमने से नहीं रोक पाते हैं। संगीत प्रेमियों के बीच इस गीत का क्रेज आज भी उतना ही बरकरार है जितना कि इसके रिलीज होने के समय हुआ करता था। गानों के शौकीन लोग आज भी इस पुरानी धुन पर थिरकना पसंद करते हैं जो इस बात का पक्का प्रमाण है कि पुराना संगीत कभी भी पुराना नहीं होता है। गायकों की जादुई आवाज और कलाकारों के बेहतरीन अभिनय का ऐसा तालमेल बहुत कम देखने को मिलता है। इस गीत के हर एक हिस्से को बहुत ही खूबसूरती से तैयार किया गया था ताकि दर्शक इसे बार-बार देखना और सुनना पसंद करें और यही कारण है कि यह आज भी लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है।
नब्बे के दौर के संगीत की पुरानी यादें और महत्व
भारतीय सिनेमा का नब्बे के दशक का दौर अपने बेहतरीन और सदाबहार संगीत के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। उस समय के गाने केवल मनोरंजन का साधन नहीं होते थे बल्कि वे लोगों की भावनाओं से भी पूरी तरह जुड़े होते थे। इस प्रकार के पुराने और लोकप्रिय गीतों के माध्यम से दर्शक अपने पुराने दिनों की सुनहरी यादों को ताजा कर लेते हैं। आज के आधुनिक समय में जब संगीत बहुत तेजी से बदल रहा है, तब भी ऐसे पुराने गाने अपनी एक अलग पहचान और वजूद बनाए हुए हैं। नई पीढ़ी के लोग भी पुराने दौर के इन गानों की धुनों और लेहजे को उतना ही पसंद करते हैं जितना कि उस समय के लोग करते थे। कलाकारों की मेहनत और निर्देशकों की रचनात्मकता इन गानों को हमेशा के लिए जीवंत बनाए रखती है। इस तरह की पुरानी रचनाएं हमें यह सिखाती हैं कि सच्ची कला समय की सीमाओं से परे होती है और वह हर दौर में लोगों का दिल जीतने की पूरी क्षमता रखती है। संगीत के जानकारों का मानना है कि ऐसे गीत आने वाले कई दशकों तक लोगों के दिलों पर राज करते रहेंगे और दर्शकों को झूमने पर मजबूर करते रहेंगे। यह पूरी पृष्ठभूमि हमें यह समझाने के लिए काफी है कि क्यों आज भी लोग इस तीस साल पुराने गाने को उतनी ही शिद्दत और चाव के साथ सुनना पसंद करते हैं।