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सांस्कृतिक गहराई: आलिया भट्ट की फिल्म 'राजी' का लोकप्रिय गाना कश्मीरी परंपरा से है गहराई से जुड़ा

बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट की फिल्म 'राजी' का एक विशेष गाना केवल फिल्मी मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कश्मीरी संस्कृति और परंपराओं की एक बहुत ही खास झलक पेश करता है।

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Ankit Yadav
17 सित 2026, 10:54
सांस्कृतिक गहराई: आलिया भट्ट की फिल्म 'राजी' का लोकप्रिय गाना कश्मीरी परंपरा से है गहराई से जुड़ा
भारतीय सिनेमा जगत में अक्सर ऐसी कई धुनें और गीत बनाए जाते हैं जो सीधे दर्शकों के दिलों को छू लेते हैं। ऐसा ही एक बेहद भावुक और लोकप्रिय गाना आलिया भट्ट और विक्की कौशल स्टारर चर्चित फिल्म 'राजी' का है, जिसे मशहूर पार्श्व गायिका हर्षदीप कौर ने अपनी दिलकश आवाज से सजाया है। इस गाने को लेकर हाल ही में सांस्कृतिक दृष्टिकोण से कई दिलचस्प बातें सामने आई हैं, जो यह दर्शाती हैं कि यह सिर्फ एक फिल्मी कंपोजीशन नहीं है, बल्कि इसके तार सीधे कश्मीरी संस्कृति की गहराई से जुड़े हुए हैं।

कश्मीरी परंपरा और बेटियों की विदाई का अनूठा संगम

पारंपरिक रूप से कश्मीर में जब बेटियों की शादी होती है और उन्हें उनके ससुराल के लिए विदा किया जाता है, तो इस तरह के पारंपरिक गीतों को गाने की पुरानी रीत रही है। इस गाने के बोल और इसकी धुन उस सांस्कृतिक विरासत को बड़े ही खूबसूरत तरीके से पर्दे पर उतारती है। जब भी इस गाने को सुना जाता है, तो यह सुनने वालों की आंखों में आंसू ले आता है क्योंकि इसमें भावनाओं का एक अलग ही सैलाब होता है। यह गीत असल में उस जज्बात को बयां करता है जो एक बेटी की विदाई के वक्त उसके परिवार और खुद उसके मन में उमड़ते हैं। सिनेमा प्रेमियों और संगीत के जानकारों का मानना है कि ऐसे गाने क्षेत्रीय संस्कृति को मुख्यधारा के सिनेमा के जरिए देश और दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने का काम करते हैं। लखनऊ और उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी जहां कला और संगीत की गहरी समझ रखने वाले लोग रहते हैं, इस गाने की सुरीली बनावट और इसके भावुक शब्दों को बेहद सराहा गया है। लोग अक्सर इस बात की चर्चा करते हैं कि कैसे एक कमर्शियल फिल्म में भी पारंपरिक लोक संस्कृति की खुशबू को इतने सधे हुए तरीके से पिरोया जा सकता है।

संगीत प्रेमियों के बीच आज भी लोकप्रिय है यह धुन

भले ही इस फिल्म को रिलीज हुए काफी समय बीत चुका हो, लेकिन इसके इस खास गाने की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। आज भी शादी-ब्याह के माहौल में या फिर भावनात्मक पलों में लोग इस ट्रैक को याद करते हैं। हर्षदीप कौर की जादुई आवाज और आलिया भट्ट के बेहतरीन अभिनय ने मिलकर इस प्रस्तुति को अमर बना दिया है। आने वाले समय में भी ऐसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध गीत दर्शकों के दिलों पर राज करते रहेंगे और हमारी पारंपरिक धरोहर को नई पीढ़ी से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बने रहेंगे।
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