इंजीनियर बनने का सपना और फिल्मों की दुनिया फिल्म निर्माण की दुनिया में कदम रखने से पहले महान निर्देशक यश चोपड़ा का मुख्य लक्ष्य कुछ और ही था और वह जीवन में एक योग्य इंजीनियर बनना चाहते थे। उस दौर में उनके परिवार का झुकाव और तकनीकी शिक्षा के प्रति उनका अपना आकर्षण उन्हें विज्ञान और निर्माण कला की तरफ खींच रहा था। हालांकि किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और समय के साथ उनके भीतर की कलात्मकता प्रबल होती चली गई। अपने भाई बीआर चोपड़ा के साथ जुड़कर उन्होंने फिल्मों के निर्माण कार्य में हाथ बंटाना शुरू किया और यहीं से उनकी असली रचनात्मक यात्रा की शुरुआत हुई। उन्होंने धीरे-धीरे निर्देशन की बारीकियों को समझा और एक ऐसे मुकाम को हासिल किया जहां उनकी बनाई हर कहानी ने भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नया मील का पत्थर स्थापित कर दिया। इस प्रकार एक उभरते हुए इंजीनियर का मन सिनेमा के भव्य कैनवास पर रंग भरने के लिए मचल उठा और उन्होंने अपने जीवन की पूरी दिशा ही बदल डाली।
पर्दे पर रेखा और अमिताभ की आखिरी जोड़ी अपने लंबे और शानदार करियर के दौरान यश चोपड़ा ने कई ऐतिहासिक और यादगार फिल्मों का निर्देशन किया जिनमें प्रसिद्ध कलाकारों की जोड़ियों ने सिल्वर स्क्रीन पर अमिट छाप छोड़ी। उनके निर्देशन में ही भारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन और मशहूर अभिनेत्री रेखा को आखिरी बार एक साथ बड़े पर्दे पर साथ काम करने का अवसर मिला था। इस प्रतिष्ठित जोड़ी ने अपनी जादुई अदाकारी और गजब की केमिस्ट्री से दर्शकों के दिलों पर जो जादू चलाया वह आज भी सिनेमा प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना रहता है। इस फिल्म में दोनों दिग्गजों के अभिनय ने जिस प्रकार प्राण फूंके उसने पारिवारिक ड्रामा और रोमांस की परिभाषा को पूरी तरह से बदलकर रख दिया। निर्देशक ने जिस संवेदनशीलता के साथ दोनों के किरदारों को गढ़ा था उसने इस प्रोजेक्ट को हमेशा के लिए अमर बना दिया और आज भी जब इस जोड़ी का जिक्र होता है तो इस विशेष फिल्म का नाम सबसे पहले लिया जाता है।
सिनेमाई विरासत और आज भी कायम आकर्षण यश चोपड़ा द्वारा गढ़ी गई यह सिनेमाई विरासत आज भी नई पीढ़ी के फिल्मकारों के लिए एक बड़ी प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है और उनके काम का अध्ययन किया जाता है। उनके द्वारा स्थापित स्टूडियो और उनकी रोमांटिक फिल्मों का प्रभाव भारतीय संस्कृति तथा लोकप्रिय संगीत पर गहराई से अंकित है जिसे कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है। जब कभी भी हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की बात की जाती है तो उनके योगदान और उनकी फिल्मों में नजर आने वाले जादुई पलों को अवश्य याद किया जाता है। दर्शक आज भी उस दौर के कलाकारों की अदाकारी और बेहतरीन पटकथाओं को उतने ही चाव से देखते हैं जितना वे तब पसंद करते थे। आने वाले समय में भी उनकी फिल्मों के ये क्लासिक पल और पर्दे पर उकेरी गई वे खूबसूरत यादें सिनेमा के इतिहास में चमकती रहेंगी और हर प्रेमी के दिल में अपनी विशेष जगह बनाए रखेंगी।