अंतरराष्ट्रीय मंचों से भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर मुहर भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक ही दिन के भीतर कई सकारात्मक और उत्साहवर्धक खबरें सामने आई हैं जिससे पूरे देश के वित्तीय गलियारों में खुशी का माहौल देखा जा रहा है। वैश्विक स्तर पर वित्तीय मामलों का आकलन करने वाली प्रतिष्ठित रेटिंग एजेंसी फिच और एशियाई विकास बैंक यानी एडीबी ने भारतीय बाजार की मजबूत स्थिति को लेकर अपनी रिपोर्ट जारी की है। इन रिपोर्टों के अनुसार, देश की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार न केवल स्थिर बनी हुई है बल्कि आने वाले समय में इसके और अधिक गति पकड़ने की पूरी संभावना है। दुनिया भर की तमाम अर्थव्यवस्थाएं जब इस समय मंदी या सुस्ती के दौर से जूझ रही हैं, तब भारतीय बाजार का इस तरह से लगातार आगे बढ़ना यह साबित करता है कि देश की नीतियां सही दिशा में काम कर रही हैं। इन संस्थानों के विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू स्तर पर मांग में तेजी और मजबूत बुनियादी ढांचे की वजह से देश की अर्थव्यवस्था वैश्विक झटकों को झेलने में पूरी तरह सक्षम है और यही कारण है कि निवेशक भी भारत को लेकर बेहद आशावादी नजर आ रहे हैं।
वैश्विक संस्थाओं के आकलन और भारतीय बाजार की पृष्ठभूमि किसी भी विकासशील देश के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं की रेटिंग और उनके द्वारा जारी की जाने वाली भविष्यवाणियां बहुत अधिक मायने रखती हैं क्योंकि इसी आधार पर विदेशी निवेशक अपने पूंजी निवेश का फैसला करते हैं। फिच और एडीबी जैसी नामी गिरामी वैश्विक संस्थाओं द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था के पक्ष में सकारात्मक बयान देना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि देश में व्यापार करने का माहौल लगातार बेहतर हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान सरकार द्वारा उठाए गए आर्थिक सुधारों, कर प्रणाली में पारदर्शिता लाने और बुनियादी ढांचे के विकास पर दिए गए जोर ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा जीतने का काम किया है। इसके अलावा देश के भीतर डिजिटल भुगतान प्रणाली का विस्तार और विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं ने आर्थिक गतिविधियों को एक नई गति प्रदान की है। ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में उपभोग की मांग में सुधार देखा गया है जिससे औद्योगिक उत्पादन को भी बल मिला है। इन सभी कारकों का मिला-जुला परिणाम है कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की सूची में सबसे ऊपर अपनी जगह बनाए हुए है।
आर्थिक प्रगति का बाजार और भविष्य की संभावनाओं पर असर इन तीनों बड़ी सकारात्मक खबरों का सीधा असर आने वाले दिनों में देश के शेयर बाजार, रोजगार के अवसरों और आम जनता की जेब पर पड़ने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की साख मजबूत होती है तो विदेशी संस्थागत निवेशकों का पैसा भारतीय कंपनियों में अधिक मात्रा में आता है, जिससे शेयर बाजार को नई ऊंचाइयां मिलती हैं और कॉरपोरेट जगत के विस्तार का मार्ग प्रशस्त होता है। इसके साथ ही देश के भीतर रोजगार के नए द्वार खुलते हैं क्योंकि जब आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं तो विभिन्न क्षेत्रों में कार्यबल की मांग भी स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों के लिए भी इस तरह की अनुकूल परिस्थितियां व्यापार बढ़ाने और अपनी वित्तीय स्थिति को सुधारने का एक सुनहरा अवसर प्रदान करती हैं। हालांकि विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इस निरंतरता को बनाए रखने के लिए मुद्रास्फीति पर नियंत्रण रखना और मौद्रिक नीतियों में संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक होगा। यदि देश इसी गति से आगे बढ़ता रहा तो आने वाले वर्षों में यह अर्थव्यवस्था वैश्विक पटल पर एक और भी बड़ी ताकत बनकर उभरेगी।