सप्ताह के पहले दिन बाजार में बड़ी गिरावट
घरेलू शेयर बाजार के लिए सप्ताह का पहला कारोबारी दिन काफी खराब साबित हुआ। मुख्य सूचकांकों में भारी बिकवाली का दौर देखने को मिला जिससे निवेशकों की पूंजी में भारी कमी आई। निफ्टी 360 अंकों की भारी गिरावट के साथ 22,780 के स्तर पर बंद हुआ। इसके अलावा सेंसेक्स में भी 1124 अंकों की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह 72,772 के स्तर पर बंद हुआ। बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों में भी निवेशकों ने जमकर बिकवाली की जिससे बैंक निफ्टी 1109 अंकों की भारी गिरावट के साथ 54,472 के स्तर पर बंद हुआ। इस प्रकार कारोबार के अंत में बाजार के सभी प्रमुख पैमानों पर निवेशकों को तगड़ा झटका लगा। बाजार में अचानक आई इस तेज गिरावट से पूरे कारोबारी जगत में मायूसी छा गई और विश्लेषक भी इस स्थिति पर अपनी नजर बनाए हुए हैं।
कारोबारी सत्र के दौरान प्रमुख सूचकांकों का हाल
कारोबारी सत्र की शुरुआत से ही बाजार पर बिकवाली का भारी दबाव बना रहा। निवेशक अपने शेयरों को बेचने के लिए लगातार आगे आए जिससे बाजार के सभी प्रमुख सूचकांक तेजी से नीचे लुढ़क गए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1124 अंक टूटकर 72,772 पर पहुंच गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी सूचकांक 360 अंकों के नुकसान के साथ 22,780 के स्तर पर सिमट गया। वित्तीय कंपनियों और बैंकों के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई जिसके कारण बैंक निफ्टी 1109 अंकों का गोता लगाकर 54,472 के स्तर पर बंद हुआ। सत्र के दौरान किसी भी स्तर पर बाजार में कोई रिकवरी देखने को नहीं मिली। दिन भर के कारोबार के दौरान बिकवाली का यह सिलसिला लगातार जारी रहा जिससे बाजार के सभी बड़े काउंटर लाल निशान के साथ बंद होने के लिए मजबूर हो गए।
शेयर बाजार की चाल और निवेशकों पर इसका असर
शेयर बाजार में इस तरह की अचानक और भारी गिरावट का सीधा असर छोटे और बड़े निवेशकों की संपत्ति पर पड़ता है। जब सेंसेक्स और निफ्टी में इस पैमाने की गिरावट आती है तो बाजार से निवेशकों की पूंजी तेजी से कम हो जाती है। बैंक निफ्टी में आई 1109 अंकों की भारी कमजोरी यह दर्शाती है कि बैंकिंग शेयरों में बहुत अधिक दबाव बना हुआ था। इस प्रकार की उथल-पुथल अक्सर वैश्विक संकेतों या घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के कारण पैदा होती है। निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों के लिए ऐसे दिन काफी तनावपूर्ण होते हैं क्योंकि वे अपनी पोर्टफोलियो की कीमत में आई भारी गिरावट का आकलन करते हैं। भविष्य में बाजार की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक परिस्थितियां कैसी रहती हैं और नियामक संस्थाएं या सरकार किस तरह के कदम उठाती हैं।