सेंसेक्स और निफ्टी में शानदार बढ़त
अक्टूबर महीने की नौ तारीख को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बेहद मजबूत आंकड़ों के साथ हुई। बाजार के खुलते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स सात सौ अंकों से अधिक की छलांग लगाकर ऊपर चढ़ गया। इसके अलावा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी सूचकांक भी दो सौ से ज्यादा अंकों की बढ़त हासिल करने में कामयाब रहा। इस कारोबारी सत्र की शुरुआत में ही देश की बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयर हरे निशान के दायरे में व्यापार करते दिखाई दिए। टीसीएस के शेयरों में तीन दशमलव तीन नौ प्रतिशत की तेजी आई जबकि इंफोसिस के शेयरों ने दो दशमलव छह दो प्रतिशत का लाभ दर्ज किया। इसके साथ ही एचसीएल टेक के शेयर दो दशमलव पांच तीन प्रतिशत और विप्रो के शेयर दो दशमलव चार सात प्रतिशत की मजबूती के साथ आगे बढ़े। इस शुरुआती दौर में घरेलू मुद्रा रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत स्थिति में नजर आया। रुपया चार पैसे की मजबूती दिखाते हुए छानबे रुपये चौहत्तर पैसे प्रति डॉलर के स्तर पर खुला जबकि इसके पहले यह छानबे रुपये अठहत्तर पैसे प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
अमेरिका की कार्रवाई और कंपनियों का रुख
अमेरिकी सरकार के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक समेत आठ प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से निलंबित कर दिया है। यह विशेष कार्यक्रम अमेरिका में रोजगार के आधार पर विदेशी नागरिकों को ग्रीन कार्ड जारी किए जाने की प्रक्रिया का एक बहुत ही अहम हिस्सा माना जाता है। इस निलंबन के बाद यह अंदेशा जताया जा रहा था कि प्रभावित संस्थानों के शेयरों पर भारी दबाव आ सकता है। हालांकि इसके बावजूद निवेशकों ने शुरुआती घंटों में किसी भी प्रकार की बड़ी बिकवाली करने से पूरी तरह परहेज किया। सॉफ्टवेयर सेवा कंपनियों के राष्ट्रीय संगठन नैसकॉम ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि अमेरिकी निर्णय केवल ग्रीन कार्ड की एक खास प्रक्रिया को प्रभावित करता है और इससे एच-1बी वीजा व्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ता है। संगठन का यह भी कहना है कि भारतीय कंपनियों ने अमेरिका में अपनी स्थानीय नियुक्तियों को काफी बढ़ाया है। टीसीएस ने अपनी प्रतिक्रिया में बताया कि इस कार्रवाई का उसकी स्थानीय भर्ती रणनीति पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा और वह अगले पांच वर्षों में पंद्रह हजार लोगों को रोजगार देने की अपनी योजना पर पूरी तरह कायम है।
विदेशी बाजारों का हाल और भविष्य की स्थिति
अमेरिकी कार्रवाई के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विदेशी बाजारों में प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों की चाल में मिलाजुला रुख देखने को मिला। नैस्डैक एक्सचेंज पर माइक्रोसॉफ्ट के शेयरों में एक दशमलव तीन पांच प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत कॉग्निजेंट के शेयरों में पांच दशमलव एक पांच प्रतिशत का भारी उछाल आया तथा एडोबी के शेयर भी तीन दशमलव पांच छह प्रतिशत मजबूत हुए। पेरिस के स्टॉक एक्सचेंज में कैपजेमिनी के शेयर मामूली बढ़त के साथ कारोबार करते पाए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निलंबन के बावजूद कंपनियों का रोजमर्रा का व्यावसायिक कामकाज पूरी तरह सामान्य रूप से चलता रहेगा। इस रोक का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि ये कंपनियां अमेरिका में अपना कारोबार बंद कर देंगी या वहां पहले से कार्यरत सभी विदेशी कर्मचारियों के वीजा रद्द हो जाएंगे। यही कारण रहा कि बाजार पर इसका कोई भी तात्कालिक और नकारात्मक प्रभाव देखने को नहीं मिला। हालांकि आने वाले दिनों में बाजार के निवेशकों की निगाहें कंपनियों की आधिकारिक प्रतिक्रियाओं और अमेरिकी प्रशासन की अगली कार्यप्रणाली पर टिकी रहेंगी ताकि इस फैसले के वास्तविक कारोबारी असर का सही आकलन किया जा सके।