कारोबार की शुरुआत में बाजार का हाल
भारतीय शेयर बाजार के लिए 19 अक्टूबर दिन सोमवार को कारोबार की शुरुआत काफी दबावपूर्ण माहौल में हुई थी। शुरुआती सत्र में बिकवाली हावी होने के कारण सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर से लगभग 560 अंकों तक नीचे फिसल गया था। इसके साथ ही निफ्टी सूचकांक में भी लगभग 176 अंकों की खासी कमजोरी दर्ज की गई थी। हालांकि कारोबार आगे बढ़ने के बाद बाजार ने निचले स्तरों से वापसी की कोशिश की और कुछ हद तक रिकवरी भी दिखाई। रिकवरी के बाद निफ्टी सूचकांक में सुधार आया और यह करीब 29.1 अंकों की बढ़त के साथ 23,175.25 के स्तर तक ऊपर चला गया। इसी प्रकार प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स भी करीब 120 अंकों की तेजी दर्ज करते हुए 74,849.75 के स्तर तक पहुंच गया था। इसके बावजूद बाजार की कुल चौड़ाई यानी मार्केट ब्रेड्थ काफी कमजोर बनी रही और निवेशकों में सतर्कता का माहौल साफ दिखाई दिया। पिछले तीन सत्रों के दौरान लगातार बाजार को ऊपर की दिशा में ले जाने वाले सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी सेक्टर के शेयरों की रफ्तार अब सुस्त पड़ती नजर आ रही है। इसके विपरीत पिछले लगभग एक सप्ताह से लगातार गिरावट का सामना कर रहे सार्वजनिक क्षेत्र के यानी पीएसयू बैंकिंग शेयरों में निवेशकों की तरफ से जोरदार खरीदारी की गई। निफ्टी आईटी इंडेक्स 0.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था जबकि इसके ठीक उलट निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में 2.49 प्रतिशत की जोरदार उछाल दर्ज की गई। वहीं दूसरी तरफ निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 1.30 प्रतिशत की गिरावट देखी गई और यह लाल निशान में कारोबार कर रहा था।
वैश्विक संकेत और बैंकिंग क्षेत्र का प्रदर्शन
भारतीय घरेलू बाजार पर विदेशी और वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों का साफ असर दिखाई दिया है। इसके पिछले सत्र यानी शुक्रवार के दिन अमेरिकी शेयर बाजार में टेक शेयरों पर बहुत अधिक दबाव बना रहा था। अमेरिकी बाजार के आंकड़ों के अनुसार एसएंडपी 500 इंडेक्स में 1.09 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि नैस्डैक कंपोजिट सूचकांक 2.14 प्रतिशत लुढ़क गया था। इसके अलावा सोमवार के दिन एशियाई बाजारों का रुख भी पूरी तरह मिला-जुला ही बना रहा था। इन सभी अंतरराष्ट्रीय कारणों को देखते हुए निवेशक घरेलू कंपनियों के तिमाही नतीजों और वैश्विक संकेतों को लेकर पूरी तरह सतर्क नजर आए। सेक्टर्स की बात करें तो सबसे दिलचस्प और अलग चाल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों यानी पीएसयू बैंकिंग शेयरों में देखने को मिली। सुबह के समय लगभग 9 बजकर 36 मिनट पर निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 2.49 प्रतिशत की बढ़त के साथ 8,296.40 के स्तर पर पहुंच गया था। इसके एकदम विपरीत स्थिति निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में रही जो 1.30 प्रतिशत गिर गया और निफ्टी बैंक इंडेक्स में भी 0.35 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। जानकारों के अनुसार बाजार की इन अलग-अलग चालों और सेक्टरवार उतार-चढ़ाव को कंपनियों के हालिया वित्तीय परिणामों से जोड़कर देखा जा रहा है। आईटी शेयरों में शुरुआती समय में आई नरमी को पिछले हफ्ते की जबरदस्त तेजी के बाद मुनाफावसूली किए जाने के रूप में समझा जा सकता है। 16 अक्टूबर को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान निफ्टी आईटी इंडेक्स में लगभग 11.7 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। यह वर्ष 2008 के बाद से इस विशेष सेक्टर के लिए अब तक की सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी के रूप में दर्ज की गई है।
तिमाही नतीजे और कच्चे तेल की कीमतें
इस पूरे हफ्ते के दौरान भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में कंपनियों के सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजे बेहद अहम भूमिका निभाने वाले हैं। वर्तमान समय में निवेशक कंपनियों के मुनाफे में वृद्धि, उनके मार्जिन, कर्ज की मांग और भविष्य के व्यावसायिक अनुमानों पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं। सोमवार के इस कारोबारी दिन में बैंकिंग, फाइनेंस और अन्य कई प्रमुख कंपनियों के नतीजे भी निवेशकों के मुख्य फोकस में बने हुए हैं। बेहतर तिमाही नतीजों, विशेष तौर पर एचसीएल टेक के मजबूत प्रदर्शन और वैश्विक स्तर पर एआई शेयरों में हुई बिकवाली के कारण भारतीय आईटी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी हाल के दिनों में काफी बढ़ गई थी। दूसरी तरफ कच्चे तेल की कीमतें अब भी भारत देश के लिए चिंता का एक बड़ा विषय बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में सोमवार की सुबह कुछ गिरावट जरूर दर्ज की गई थी, लेकिन इसके बावजूद यह लगभग 107.89 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर ही बनी हुई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की ये ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल, घरेलू महंगाई और भारतीय रुपये की स्थिरता पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा सकती हैं। हालांकि वर्तमान स्थिति में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई के सक्रिय दखल की वजह से घरेलू मुद्रा रुपये में मजबूती का एक सकारात्मक रुझान बना हुआ है।