सीएसआर व्यय में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों द्वारा सामाजिक कल्याण के लिए उठाए जाने वाले कदमों के तहत कोल इंडिया लिमिटेड ने अपने वित्तीय आवंटन में उल्लेखनीय विस्तार किया है। उपलब्ध ताजा आंकड़ों के मुताबिक कंपनी का कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व यानी सीएसआर बजट पहली बार एक हजार करोड़ रुपये की सीमा को लांघ गया है। यह आंकड़े पिछले बारह वर्षों की अवधि के दौरान कंपनी द्वारा किए गए निवेश और विकास कार्यों की व्यापक समीक्षा के बाद उजागर हुए हैं। खनन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले स्थानीय समुदायों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए इस धनराशि का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, स्वच्छ पेयजल और बुनियादी ढांचे के विकास पर किया जा रहा है। कंपनी के शीर्ष प्रबंधन द्वारा इस संबंध में हाल ही में विस्तृत रिपोर्ट जारी की गई है जिसमें इस ऐतिहासिक बढ़ोतरी के सभी पहलुओं को रेखांकित किया गया है।
विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व की रूपरेखा किसी भी बड़े व्यावसायिक संगठन के लिए अपनी व्यावसायिक गतिविधियों के साथ-साथ पर्यावरण और समाज के प्रति जवाबदेही निभाना बेहद अनिवार्य होता है। कोल इंडिया जैसी महाखनन कंपनियों के संचालन का दायरा देश के कई राज्यों में फैला हुआ है जहाँ कोयला खदानों के आसपास की आबादी अक्सर बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहती है। ऐसे इलाकों में शिक्षा संस्थानों का उन्नयन, रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन, और आधुनिक चिकित्सा शिविरों की स्थापना जैसे कार्य निरंतर चलाए जाते हैं। पिछले एक दशक से अधिक समय के दौरान इन कल्याणकारी पहलों पर होने वाले खर्च में क्रमिक सुधार देखा गया है जो अब अपने चरम पर पहुँच चुका है। सरकार द्वारा तय किए गए मानकों का पालन करते हुए कंपनी ने न केवल अपनी वित्तीय प्रतिबद्धताओं को पूरा किया है बल्कि ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक ठोस आधार भी तैयार किया है।
दीर्घकालिक प्रभाव और भविष्य की योजनाएं एक हजार करोड़ रुपये से अधिक के इस भारी बजट आवंटन का दूरगामी प्रभाव खनन क्षेत्रों के समीपवर्ती इलाकों के सामाजिक ताने-बाने पर पड़ना तय माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस धनराशि का पारदर्शी और प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए तो पिछड़े जिलों में कुपोषण, निरक्षरता और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से निपटने में बहुत मदद मिलेगी। स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और विस्थापित परिवारों के पुनर्वास कार्यों में तेजी आएगी। आने वाले वित्तीय वर्षों में इस बजट के और अधिक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है क्योंकि कंपनी अपनी पर्यावरणीय और सामाजिक नीतियों को और अधिक सुदृढ़ करने पर जोर दे रही है। इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि यह मील का पत्थर अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के लिए भी एक मिसाल कायम करेगा जो उन्हें अपने सामाजिक दायित्वों को अधिक गंभीरता से पूरा करने के लिए प्रेरित करेगा।