आईडीबीआई बैंक में बड़ी हिस्सेदारी बिक्री की मंजूरी
केंद्र सरकार की तरफ से एक बहुत बड़ा वित्तीय निर्णय लिया गया है जिसके तहत आईडीबीआई बैंक में रणनीतिक विनिवेश की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार द्वारा इस प्रमुख संस्थान में अपनी व्यावसायिक मौजूदगी को कम करने के लिए एक विदेशी इकाई को अधिकृत किया गया है। फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स के समर्थन वाली कनाडा इंक नामक कंपनी को इस बैंक में हिस्सेदारी खरीदने के लिए विधिवत रूप से अनुमोदित कर दिया गया है। इस आर्थिक समझौते के माध्यम से देश के बैंकिंग क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान नियमों और शर्तों का पूरा ध्यान रखा गया है ताकि देश के वित्तीय हितों की रक्षा की जा सके। संबंधित अधिकारियों ने इस प्रस्ताव को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है जिससे अब आगे के रास्ते पूरी तरह से साफ हो चुके हैं। इस प्रकार की बड़ी व्यावसायिक साझेदारियों से बैंकिंग बाजार में प्रतिस्पर्धा और अधिक बढ़ने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। आम जनता और निवेशकों के बीच भी इस सौदे को लेकर काफी उत्सुकता बनी हुई है क्योंकि यह देश के सबसे बड़े वित्तीय लेन-देन में से एक है। सरकार के इस कदम से राजकोषीय स्थिति को भी एक नया बल मिलने की बात सामने आ रही है।
हिस्सेदारी और कीमत से जुड़े वित्तीय आंकड़े
इस बड़े वाणिज्यिक सौदे के अंतर्गत विभिन्न संस्थाओं द्वारा अपनी इक्विटी का एक बड़ा हिस्सा हस्तांतरित किया जा रहा है। इस पूरी योजना के मुताबिक केंद्र सरकार इस बैंक में अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी का त्याग करेगी। इसके साथ ही देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी यानी भारतीय जीवन बीमा निगम भी इस प्रक्रिया में पीछे नहीं है। भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा इस संस्थान में अपनी कुल 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी को पूरी तरह से बेचा जाएगा। इस पूरी व्यावसायिक व्यवस्था के तहत खरीदार कंपनी को बैंक के शेयर 81 रुपये प्रति शेयर के भाव पर उपलब्ध कराए जाएंगे। शेयरों की यह कीमत दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति और बाजार मूल्यांकन के आधार पर तय की गई है। इतनी बड़ी मात्रा में शेयरों का हस्तांतरण होने से शेयर बाजार पर भी इसका गहरा असर पड़ना तय माना जा रहा है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के बड़े समझौतों से बाजार में तरलता और पूंजी का प्रवाह बेहतर तरीके से होता है। सभी संबंधित पक्षों ने इस लेन-देन को पूरा करने के लिए जरूरी दस्तावेजों और औपचारिकताओं पर काम करना शुरू कर दिया है।
सौदे के बाद शेयरधारिता का नया स्वरूप
इस वित्तीय समझौते के पूरी तरह से संपन्न हो जाने के बाद आईडीबीआई बैंक की शेयरधारिता के ढांचे में एक बड़ा और स्पष्ट बदलाव आ जाएगा। इस सौदे के सफलतापूर्वक पूरा होने के पश्चात भी केंद्र सरकार की इस बैंक में एक निश्चित हिस्सेदारी बनी रहेगी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस प्रक्रिया के बाद भी केंद्र सरकार के पास इस बैंक की 15 प्रतिशत हिस्सेदारी सुरक्षित रूप से मौजूद रहेगी। इसके अलावा देश की प्रमुख बीमा कंपनी यानी भारतीय जीवन बीमा निगम के पास भी इस बैंक की 19 प्रतिशत हिस्सेदारी बरकरार रहेगी। इस प्रकार इन दोनों ही सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थाओं की बैंक में एक महत्वपूर्ण और प्रभावी मौजूदगी आगे भी बनी रहेगी। इस संपूर्ण लेन-देन को देश के आर्थिक सुधारों के एक अहम हिस्से के रूप में देखा जा रहा है जिससे सरकारी खजाने पर से बोझ कम होगा। निवेशकों और बाजार के जानकारों का कहना है कि इससे बैंक के कामकाज में अधिक पारदर्शिता और पेशेवर दक्षता आएगी। इस तरह के विनिवेश कार्यक्रमों के जरिए सरकार अपनी संपत्तियों का पुनरुत्थान करने के साथ-साथ विकास कार्यों के लिए धन जुटाने का काम कर रही है। आने वाले समय में इस सौदे की बची हुई औपचारिकताओं को तय समयसीमा के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। यह आर्थिक कदम भविष्य के अन्य बड़े व्यावसायिक समझौतों के लिए भी एक बड़ा उदाहरण साबित हो सकता है।