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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 729 अरब डॉलर के पार, मजबूत पूंजी प्रवाह से RBI की स्थिति हुई और मजबूत

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अगस्त में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। मजबूत पूंजी प्रवाह और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में बढ़ोतरी के बीच देश का कुल रिजर्व 729 अरब डॉलर से अधिक दर्ज किया गया।

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Ankit Yadav
29 अग 2026, 13:28
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 729 अरब डॉलर के पार, मजबूत पूंजी प्रवाह से RBI की स्थिति हुई और मजबूत

भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां देश का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार 21 अगस्त तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 729.33 अरब डॉलर हो गया। यह स्तर देश की बाहरी वित्तीय स्थिति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि ऐसे समय हुई है जब वैश्विक बाजारों में ब्याज दरों, पूंजी प्रवाह और मुद्रा विनिमय को लेकर लगातार अनिश्चितता बनी हुई है। मजबूत रिजर्व भारत को बाहरी आर्थिक झटकों से निपटने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करता है। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार हो रही बढ़ोतरी से यह संकेत भी मिलता है कि भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति फिलहाल मजबूत बनी हुई है। पर्याप्त विदेशी मुद्रा उपलब्ध होने से देश को अंतरराष्ट्रीय भुगतान और आवश्यक आयातों को पूरा करने में भी मदद मिलती है।

पूंजी प्रवाह से मिली बड़ी मजबूती

हालिया बढ़ोतरी के पीछे विदेशी पूंजी प्रवाह की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। रिपोर्ट के अनुसार जून से अगस्त के बीच कई नीतिगत उपायों के कारण विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ा, जिसमें अनिवासी भारतीयों की जमा राशि भी शामिल रही। एक सप्ताह में रिजर्व में 12.4 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों और सोने के भंडार दोनों का योगदान रहा। बढ़ते प्रवाह को देखते हुए RBI ने कुछ प्रोत्साहन आधारित सुविधा को निर्धारित समय से पहले बंद करने का फैसला भी किया। विदेशी निवेश और अन्य माध्यमों से देश में आने वाली विदेशी मुद्रा भारतीय रिजर्व को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच पूंजी प्रवाह का स्थिर बने रहना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में किसी भी बड़े बदलाव का असर पूंजी के प्रवाह पर पड़ सकता है, इसलिए आने वाले समय में विदेशी निवेश की दिशा पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्या मायने

विशेषज्ञों के अनुसार, रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार रुपये की स्थिरता और बाहरी भुगतान क्षमता के लिहाज से महत्वपूर्ण है। पर्याप्त रिजर्व होने से आयात भुगतान, वैश्विक वित्तीय अस्थिरता और अचानक पूंजी निकासी जैसी परिस्थितियों से निपटने में मदद मिलती है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार सरकार और केंद्रीय बैंक को वैश्विक आर्थिक दबावों के बीच बेहतर तरीके से नीतिगत फैसले लेने की क्षमता भी देता है। खासतौर पर कच्चे तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं के आयात के लिए विदेशी मुद्रा की आवश्यकता होती है, ऐसे में बड़ा रिजर्व अर्थव्यवस्था के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। हालांकि वैश्विक ब्याज दरों और पूंजी बाजार की दिशा में बदलाव का असर आगे भी देखने को मिल सकता है। फिलहाल रिकॉर्ड स्तर का रिजर्व भारतीय अर्थव्यवस्था की बाहरी मजबूती को दर्शाता है और आने वाले महीनों में निवेश प्रवाह तथा वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों पर इसकी भूमिका महत्वपूर्ण बनी रह सकती है। यदि विदेशी पूंजी का प्रवाह मजबूत बना रहता है और वैश्विक बाजारों में स्थिरता आती है, तो भारत की विदेशी वित्तीय स्थिति आगे भी मजबूत रहने की उम्मीद की जा सकती है।

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