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बिजली संकट: सीतापुर जिले के 1570 गांवों में अंधेरा, लोग परेशान

सीतापुर जिले में बिजली संकट गहराता जा रहा है। यहां के कुल 1570 गांवों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है। स्थानीय निवासियों को इस समस्या से भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

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Ankit Yadav
09 अक्ट 2026, 18:17
बिजली संकट: सीतापुर जिले के 1570 गांवों में अंधेरा, लोग परेशान

सीतापुर जिले में गहराया गंभीर बिजली संकट

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले से बिजली आपूर्ति को लेकर एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। जिला प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस क्षेत्र के कुल 1570 गांवों में बिजली का भारी संकट चल रहा है। इन ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों को बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित होना पड़ रहा है। बिजली गुल रहने के कारण इन इलाकों के लोगों का दैनिक जीवन बुरी तरह से प्रभावित हो गया है। बच्चों की पढ़ाई से लेकर छोटे-मोटे घरेलू कामकाज और खेती-किसानी के कार्य भी इस बाधा के कारण रुक गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली न आने से उन्हें उमस और गर्मी में भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली निगम के अधिकारियों को इस समस्या के बारे में लगातार शिकायतें भेजी जा रही हैं ताकि आपूर्ति बहाल की जा सके। ग्रामीण इलाकों में बिजली संकट की यह स्थिति पिछले कुछ दिनों से लगातार बनी हुई है। इससे किसानों को सिंचाई के लिए भी समय पर बिजली नहीं मिल पा रही है जो उनकी फसलों के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। छोटे दुकानदारों और ग्रामीण उद्योगों का काम भी इस बिजली संकट के कारण ठप पड़ा हुआ है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की बदतर स्थिति

सीतापुर जिले के जिन 1570 गांवों में बिजली संकट की बात सामने आई है वहां के लोगों में व्यवस्था के प्रति गहरा रोष व्याप्त है। इन क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर जलने और लाइनों में फॉल्ट आने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं लेकिन उनका समय पर समाधान नहीं हो पा रहा है। बिजली विभाग के स्थानीय दफ्तरों में फोन करने पर भी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिल रहा है जिससे ग्रामीणों की नाराजगी और अधिक बढ़ती जा रही है। उपभोक्ता समय पर अपने बिजली बिलों का भुगतान कर रहे हैं लेकिन इसके बावजूद उन्हें सुचारू रूप से बिजली की आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। कई गांवों में तो हालात यह हैं कि पूरे चौबीस घंटों में केवल कुछ ही घंटे बिजली मिल पाती है और वह भी बहुत कम वोल्टेज के साथ आती है। कम वोल्टेज के कारण घरों में रखे महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे पंखे कूलर और फ्रिज या तो खराब हो रहे हैं या फिर चल ही नहीं पाते हैं। ग्रामीण इलाकों के लोगों ने इस गंभीर समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपे हैं और जल्द से जल्द बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने की पुरजोर मांग की है। ऊर्जा विभाग के स्थानीय अभियंता अब इन खराब लाइनों और ट्रांसफार्मर को ठीक करने का दावा कर रहे हैं लेकिन धरातल पर सुधार की गति अभी बहुत धीमी है।

बिजली संकट के आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

ग्रामीण भारत में बिजली की आपूर्ति केवल रोशनी के लिए ही नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। सीतापुर जिले के 1570 गांवों में इस प्रकार बिजली का ठप होना सीधे तौर पर वहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था और कारोबार को नुकसान पहुंचा रहा है। कृषि प्रधान इन इलाकों में ट्यूबवेल और पंपसेट पूरी तरह से बिजली पर निर्भर होते हैं और बिजली न मिलने से फसलों की सिंचाई समय पर नहीं हो पाती है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाले छोटे कुटीर उद्योग जैसे आटा चक्की धान कुटाई मिल और दुग्ध शीतलन केंद्र भी बिजली संकट के कारण बंद पड़े हैं। इन उद्योगों से जुड़े कामगारों और दुकानदारों की आजीविका पर सीधा संकट आ गया है क्योंकि उनका दैनिक रोजगार पूरी तरह से बिजली की उपलब्धता पर टिका हुआ है। शिक्षा के क्षेत्र में भी बच्चों को रात के समय लालटेन या बैटरी की रोशनी में पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है जिससे उनकी आंखों पर बुरा असर पड़ रहा है। इस प्रकार की समस्याएं न केवल नागरिकों के जीवन स्तर को गिराती हैं बल्कि सरकार की ग्रामीण विकास योजनाओं की गति को भी धीमा कर देती हैं। भविष्य में ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए मजबूत बुनियादी ढांचे और त्वरित मरम्मत सेवाओं की सख्त आवश्यकता है ताकि जनता को राहत मिल सके।

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