जियो-बीपी द्वारा कीमतों में नई वृद्धि
रिलायंस समूह की अनुषंगी कंपनी जियो-बीपी ने रविवार को ईंधन के खुदरा मूल्यों में बड़ी बढ़ोतरी लागू की है। इस बदलाव के तहत कंपनी ने पेट्रोल की कीमतों में प्रति लीटर 5 रुपये की भारी वृद्धि की है। वहीं, डीजल के खरीदारों को भी अब प्रति लीटर 3 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे। यह मूल्य संशोधन तत्काल प्रभाव से देश भर में लागू कर दिया गया है। कंपनी का यह कदम सीधे तौर पर वाहन मालिकों के दैनिक खर्च को प्रभावित करेगा। रिलायंस समूह के स्वामित्व वाली इस कंपनी के पंपों पर अब ग्राहक पुरानी दरों के मुकाबले अधिक भुगतान करने को बाध्य होंगे। कल यानी रविवार से प्रभावी हुई यह नई दरें अब लागू हैं। जियो-बीपी का यह निर्णय देश भर में फैले उनके पेट्रोल पंपों के नेटवर्क पर प्रभावी हुआ है। कंपनी द्वारा लिए गए इस फैसले के बाद से ईंधन की खरीद अब महंगी हो गई है। आम उपभोक्ताओं को अब ईंधन भरवाते समय नई बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित जियो-बीपी के पेट्रोल पंपों पर यह नई मूल्य सूची अब पूरी तरह से प्रभावी है।
सरकारी कंपनियों की कीमतों में स्थिरता
जियो-बीपी द्वारा कीमतों में इजाफा करने के बावजूद सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने अपने ग्राहकों को राहत दी है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड ने पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई परिवर्तन नहीं किया है। इन तीनों सरकारी दिग्गज कंपनियों ने ईंधन की कीमतों को वर्तमान स्तर पर ही स्थिर रखा है। देश में ईंधन के खुदरा व्यापार का एक बहुत बड़ा हिस्सा इन्हीं सरकारी कंपनियों के नियंत्रण में है। आंकड़ों के अनुसार भारत में कुल एक लाख से अधिक पेट्रोल पंप संचालित हो रहे हैं। इनमें से 90 प्रतिशत से अधिक पेट्रोल पंपों का संचालन सरकारी कंपनियां ही करती हैं। इन पंपों पर ईंधन की कीमतें अपरिवर्तित बनी हुई हैं, जिससे सरकारी पंपों के उपभोक्ताओं को राहत मिली है। निजी कंपनी के फैसले के बाद भी इन सरकारी प्रतिष्ठानों पर कीमतों में किसी भी प्रकार की वृद्धि नहीं देखी गई है। वाहन मालिक अब अपनी सुविधा के अनुसार इन सरकारी केंद्रों पर जाकर पुरानी दरों पर ही ईंधन खरीद सकते हैं। इस प्रकार बाजार में ईंधन की दोहरी मूल्य व्यवस्था फिलहाल प्रभावी दिखाई दे रही है।
पिछली कीमतों का संदर्भ और बाजार प्रभाव
ईंधन बाजार में कीमतों का यह अंतर उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है। सरकार द्वारा नियंत्रित तेल कंपनियों ने पिछली बार इस साल के मई महीने में कीमतों में बड़ा बदलाव किया था। तब सरकारी ओएमसी ने पेट्रोल और डीजल के दामों में प्रति लीटर करीब 7.50 रुपये की वृद्धि की थी। उस समय देश भर के सरकारी पंपों पर ईंधन की कीमतें एक साथ बढ़ाई गई थीं। वर्तमान स्थिति में जियो-बीपी द्वारा की गई यह वृद्धि निजी और सरकारी कीमतों के बीच एक बड़ा फासला पैदा करती है। देश के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर सरकारी नियंत्रण होने के कारण, ईंधन की कीमतों में व्यापक अस्थिरता फिलहाल नहीं देखी गई है। हालांकि निजी क्षेत्र की कंपनी द्वारा लिए गए इस निर्णय ने बाजार में चर्चा को जन्म दे दिया है। वाहन चालकों को सलाह दी जाती है कि वे ईंधन भरवाने से पहले पास के पेट्रोल पंप पर कीमतों की जांच कर लें। देश के विभिन्न राज्यों जैसे दिल्ली, मुंबई, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सरकारी दरों के स्थिर रहने से लोगों को बड़ी राहत महसूस हो रही है। भविष्य में कीमतों को लेकर सरकारी कंपनियों का क्या रुख रहेगा, इस पर फिलहाल कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया है।