एक्सपो में कश्मीरी और भदोही कालीनों का प्रदर्शन
भदोही में आयोजित कालीन एक्सपो में भारतीय हस्तशिल्प की अद्भुत विविधता देखने को मिली है। कश्मीर की बारीक बुनावट और भदोही की पारंपरिक शैली के कालीनों ने खरीदारों को विशेष रूप से आकर्षित किया। इन कालीनों में रेशम और ऊन के धागों का उपयोग कर कारीगरों ने अपनी कलात्मक सोच को जीवंत रूप दिया है। प्रदर्शनी में विभिन्न क्षेत्रों के उत्पाद एक साथ मौजूद थे, जो भारतीय कालीन उद्योग की ताकत को दर्शाते हैं। कार्यक्रम के दौरान नए फॉल-विंटर रंगों और आधुनिक डिजाइनों की झलक भी मिली, जो बदलते बाजार के रुझानों को प्रदर्शित करती है। एक्सपो केवल कालीनों का प्रदर्शन मात्र नहीं रहा, बल्कि यह उद्योग से जुड़े पुराने साथियों और निर्यातकों के बीच संवाद का एक बड़ा केंद्र बन गया। यहां खरीदारों ने कालीनों की बारीकी को सराहा और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाने में रुचि दिखाई। ग्लोबल ओवरसीज और ओपी कारपेट जैसे स्टॉल्स पर विदेशी खरीदारों की भारी भीड़ देखी गई, जो भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता के प्रति उनकी गहरी रुचि को स्पष्ट करती है।
मुख्यमंत्री का दौरा और निर्यातकों की मांगे
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्सपो के उद्घाटन अवसर पर पहुंचकर उद्योग जगत का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने स्टॉल्स का दौरा किया और वहां प्रदर्शित विशेष कालीनों को गौर से देखा, जिनमें अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय की चित्रकारी वाले कालीन प्रमुख थे। ग्लोबल ओवरसीज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को गदा और संत रविदास की मूर्ति भेंट की। इस दौरान निर्यातकों ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी विभिन्न मांगें रखीं, जिनमें उद्योग के लिए एक पृथक नीति, विशेष दर्जा और बेहतर आधारभूत सुविधाएं शामिल थीं। निर्यातकों ने विंध्य एक्सप्रेस-वे के लिए आभार प्रकट करते हुए माधोसिंह रेलवे क्रॉसिंग पर एक नए ओवरब्रिज के निर्माण की भी पुरजोर मांग की। मुख्यमंत्री ने सभी की समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुना और सरकार की ओर से हर संभव सकारात्मक सहयोग का भरोसा दिलाया। इसके अतिरिक्त, सीईपीसी के बुनकर प्रशिक्षण केंद्र की महिला बुनकरों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि उकेरकर बनाई गई कालीन भी चर्चा का विषय रही और लोगों ने इसकी खूब प्रशंसा की।
बदलते बाजार में कालीन उद्योग की राह
वैश्विक बाजार में बने रहने के लिए कालीन उद्योग को अब केवल पुरानी प्रतिष्ठा पर निर्भर नहीं रहना होगा। खरीदार अली रेजा जैसे विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली और ग्राहकों की नई पसंद के अनुरूप हर दिन नए डिजाइन और रंगों का प्रयोग करना अनिवार्य है। हस्तनिर्मित कालीन की खूबसूरती उसकी मानवीय छुअन में है, जिसे अब आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ना समय की मांग है। कालीन उद्योग की सफलता का असली पैमाना निर्यात के बड़े आंकड़े नहीं, बल्कि इसका लाभ बुनकरों और कारीगरों तक पहुंचना है। भविष्य में वही उद्योग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बना पाएगा जो अपनी जड़ों और परंपरा को सुरक्षित रखते हुए नवाचार को अपनाएगा। यह आयोजन अब अपनी आधी सदी का सफर पूरा कर चुका है और एक नए दौर की ओर बढ़ रहा है। उद्योग जगत को उम्मीद है कि एक्सपो में हुई चर्चाएं और मुख्यमंत्री के साथ हुआ सीधा संवाद भविष्य में ठोस नीतिगत निर्णयों में तब्दील होगा, जिससे भदोही के लाखों कारीगरों के हाथों को और अधिक मजबूती मिलेगी।