कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
मुझे गालियां पड़ेंगी, लेकिन...; योगेंद्र यादव ने कहा- अभी मोदी का इस्तीफा नहीं चाहते लोग      सऊदी अरब में दो बांग्लादेशियों को मौत की सज़ा दिए जाने से जुड़े वे सवाल जो हैं अनसुलझे      'पाकिस्तान को अलग-थलग नहीं कर सकता भारत', मार्को रुबियो के बयान पर बोले पाकिस्तानी डिफेंस एक्सपर्ट      फ़्रांस के राष्ट्रपति विदेशी नेताओं पर भड़के, 'इस्लामी और प्रवासी भीड़' के आरोप पर दिया जवाब      असम सरकार का बड़ा फैसला, रिटायरमेंट से 1 साल पहले शुरू होगी पेंशन की प्रक्रिया      Tiger Shroff Attack Case में बड़ा खुलासा, वारदात से पहले शूटरों ने की थी बंदूक चलाने की प्रैक्टिस, हुआ था म      PM बोले-कुछ लोग विदेशों में भारत को बदनाम कर रहे: कांग्रेस कब तक अपने फेल प्रोडक्ट की लॉन्चिंग के लिए देश क...      दिल्‍ली नगर निगम में विकास निधि-प्रदूषण पर AAP का हंगामा, पार्षदों में हाथापाई की नौबत; मेयर को सुरक्षित निकाला     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
व्यापार

कालीन व्यापार की चमक: जयपुर के राजमहलों में मिर्जापुर की हस्तकला की भारी मांग

जयपुर के शाही महलों और लग्जरी होटलों की सजावट में मिर्जापुर की हस्तनिर्मित कालीनों का विशेष स्थान है। दीपावली के अवसर पर इन कालीनों की बिक्री में भारी इजाफा देखा जा रहा है।

A
Ankit Yadav
09 अक्ट 2026, 17:14
कालीन व्यापार की चमक: जयपुर के राजमहलों में मिर्जापुर की हस्तकला की भारी मांग

जयपुर में मिर्जापुर की कालीनों का आकर्षण

राजस्थान की राजधानी जयपुर अपनी अनूठी कला और संस्कृति के लिए वैश्विक स्तर पर पहचानी जाती है। यहां के ऐतिहासिक किलों, भव्य महलों और आलीशान होटलों की सुंदरता को बढ़ाने में उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से आने वाली कालीनों की अहम भूमिका होती है। वर्तमान में शहर के जवाहर कला केंद्र में मिर्जापुर के कारीगरों ने अपने द्वारा तैयार की गई विशेष कालीनों का प्रदर्शन किया है। जयपुर के लोग और यहाँ आने वाले पर्यटक इन हस्तशिल्प उत्पादों को विशेष रूप से पसंद करते हैं। मिर्जापुर की कालीन अपनी मजबूती और बारीक बुनाई के कारण आम ग्राहकों से लेकर वीआईपी लोगों तक की पहली पसंद बनी हुई है। दिवाली जैसे त्योहारों के सीजन में इन कालीनों की मांग में जबरदस्त उछाल देखा जाता है, जिसके चलते कारीगर साल भर इस व्यापारिक अवसर की प्रतीक्षा करते हैं और अपनी बेहतरीन कलाकृतियां लेकर राजस्थान आते हैं।

विविधता और कारीगरी की अनूठी विशेषताएं

मिर्जापुर की कालीनें पूरी तरह से हाथों से तैयार की जाती हैं, जो इन्हें मशीन से बने उत्पादों से अलग और बेहतर बनाती हैं। इन कालीनों को वूलन, कॉटन और सिल्क जैसे विभिन्न सामग्रियों का उपयोग करके अलग-अलग रंगों और आकारों में बुना जाता है। कारीगरों के अनुसार, एक बेहतरीन कालीन तैयार करने में साधारणतः पांच से दस दिनों का समय लगता है, जबकि कुछ जटिल और बड़ी डिजाइनों वाली कालीनों को पूरा करने में कई कारीगरों को महीनों तक मेहनत करनी पड़ती है। ये उत्पाद पूरी तरह से वॉटरप्रूफ और धोने योग्य होते हैं, जो इन्हें लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखते हैं। जयपुर के बाजार में विशेष रूप से टर्किश और मॉडर्न डिजाइनों की भारी मांग रहती है। ग्राहकों की पसंद और बजट के अनुसार यहाँ पांच हजार रुपये से लेकर लाखों रुपये तक की कालीनें उपलब्ध हैं, जिनमें पचास हजार से पंद्रह लाख रुपये तक की कालीनों की खरीद सबसे अधिक होती है।

वैश्विक बाजार में बढ़ती मांग और व्यापारिक विस्तार

मिर्जापुर की कालीन बनाने की कला उत्तर प्रदेश के कारीगरों की पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है। जयपुर की ऐतिहासिक इमारतों और कोठियों की साज-सज्जा में इन कालीनों की बढ़ती मांग ने इसे एक बड़ा व्यापारिक केंद्र बना दिया है। मिर्जापुर के कारीगर सिर्फ जयपुर ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी पहचान बना चुके हैं। ऑस्ट्रेलिया, ईरान और टर्की जैसे देशों में उच्च गुणवत्ता वाली सिल्क कालीनों का निर्यात किया जाता है, जिनकी कीमत पचास लाख रुपये तक पहुंच जाती है। हाल ही में कजाकिस्तान को तीन करोड़ रुपये मूल्य की कालीन भेजी गई है, जो इस उद्योग की वैश्विक सफलता को दर्शाता है। दुनिया भर से मिल रहे ऑर्डरों के बीच, कारीगर भारत के विभिन्न शॉपिंग फेस्टिवल्स में भी लगातार भाग ले रहे हैं। जयपुर की सांस्कृतिक विरासत और यहाँ की जीवनशैली के कारण अन्य शहरों की तुलना में यहाँ की मांग निरंतर बनी रहती है, जो कारीगरों को प्रोत्साहित करती है।

कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज