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कारोबारी संकट: मेरठ का खेल उपकरण उद्योग ऑर्डर और आंकड़ों की उलझन में फंसा

मेरठ के प्रसिद्ध खेल उपकरण उद्योग में इस समय गंभीर संकट की स्थिति बनी हुई है। कारोबारियों को मिलने वाले ऑर्डर्स में हेरफेर और आंकड़ों की बाजीगरी के कारण पूरा सेक्टर गहरे असमंजस में फंस गया है, जिसका सीधा असर ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले कारीगरों की आजीविका पर पड़ रहा है।

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Ankit Yadav
09 सित 2026, 13:34
कारोबारी संकट: मेरठ का खेल उपकरण उद्योग ऑर्डर और आंकड़ों की उलझन में फंसा
उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शुमार मेरठ अपनी खेल सामग्री निर्माण के लिए दुनियाभर में एक अलग पहचान रखता है। यहां बनने वाले क्रिकेट बैट, बॉल, हॉकी और अन्य खेल उपकरण देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक सप्लाई किए जाते हैं। हालांकि, वर्तमान में इस ऐतिहासिक उद्योग को लेकर परेशान करने वाली खबरें सामने आ रही हैं। कारोबार से जुड़े सूत्रों और रिपोर्टों के अनुसार, बाज़ार में ऑर्डर्स के वितरण और कागज़ी आंकड़ों के बीच एक बड़ा घालमेल चल रहा है। इस स्थिति ने स्थानीय स्तर पर उत्पादन चक्र को पूरी तरह से बाधित कर दिया है और कई बड़ी इकाइयां संकट के दौर से गुजर रही हैं।

कारीगरों की दयनीय स्थिति और खाली हाथ

उत्पादकों और बड़े व्यापारियों के बीच चल रहे इस अदृश्य संघर्ष और आंकड़ों के खेल का सबसे भारी खामियाजा उन मेहनतकश कारीगरों को भुगतना पड़ रहा है जो दिन-रात अपनी कला और मेहनत से इन खेल उपकरणों को तैयार करते हैं। स्थिति यह हो गई है कि इन कारीगरों के पास पर्याप्त काम नहीं बचा है और उनके हाथ पूरी तरह से खाली हैं। दिहाड़ी और अनुबंध पर काम करने वाले ये कामगार अपने परिवारों का भरण-पोषण करने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं। लंबे समय से इस क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे अनुभवी कारीगरों का कहना है कि उन्हें न तो समय पर उचित पारिश्रमिक मिल रहा है और न ही निरंतर काम की कोई गारंटी बची है, जिससे उनके सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस उद्योग में व्याप्त प्रशासनिक और व्यापारिक विसंगतियों को जल्द दूर नहीं किया गया, तो मेरठ का यह प्रतिष्ठित खेल उद्योग अपनी चमक खो सकता है। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तेजी से घट रहे हैं, और यदि यही हाल रहा तो कुशल कारीगर इस पारंपरिक पेशे को छोड़कर दूसरे क्षेत्रों की ओर पलायन करने पर मजबूर हो जाएंगे। उद्योग संघों और संबंधित विभागों को इस ओर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि कागज़ी आंकड़ों के जाल से इस कारोबार को बाहर निकाला जा सके। आने वाले दिनों में यदि प्रशासन और व्यापारिक संगठनों ने मिलकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। सरकार और स्थानीय निकायों से यह अपेक्षा की जा रही है कि वे हस्तक्षेप करें और इस बात की निष्पक्ष जांच करें कि आखिर क्यों ऑर्डर्स का वास्तविक लाभ ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है। कारीगरों के हितों की रक्षा और मेरठ के इस गौरवशाली उद्योग को बचाने के लिए नीतिगत स्तर पर कड़े सुधारों की सख्त जरूरत है।
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