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कृषि क्रांति: तवांग में मंडुआ की उन्नत खेती को मिला बढ़ावा, किसानों को दी गई तकनीकी जानकारी

अरुणाचल प्रदेश के तवांग क्षेत्र में मंडुआ यानी रागी की उन्नत खेती को प्रोत्साहन देने के लिए एक विशेष अभियान चलाया गया है, जिसके तहत स्थानीय किसानों को आधुनिक तकनीकों और उन्नत किस्मों की जानकारी मुहैया कराई गई है।

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Ankit Yadav
29 अग 2026, 11:38
कृषि क्रांति: तवांग में मंडुआ की उन्नत खेती को मिला बढ़ावा, किसानों को दी गई तकनीकी जानकारी
अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती और पहाड़ी जिले तवांग में पारंपरिक फसलों के उत्पादन को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। हाल ही में आयोजित एक विशेष कृषि सत्र के दौरान स्थानीय किसानों को मंडुआ यानी रागी की वैज्ञानिक और उन्नत खेती के तौर-तरीकों से अवगत कराया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रों में खेती की उत्पादकता को बढ़ाना और किसानों की आय में सुधार करना है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके। कृषि विशेषज्ञों ने इस दौरान किसानों के साथ अपने अनुभव साझा किए और खेती में आ रही व्यावहारिक बाधाओं को दूर करने के लिए कई अहम उपाय सुझाए।

वीएल मंडुआ 376 का शानदार प्रदर्शन

उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्रों के अनुकूल विकसित की गई 'वीएल मंडुआ 376' किस्म ने इस क्षेत्र में बेहद उत्साहजनक परिणाम दिखाए हैं। इस विशेष किस्म की खूबी यह है कि यह कठिन मौसम और पहाड़ी मिट्टी में भी बेहतर पैदावार देने में सक्षम है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को इस किस्म की बुवाई से लेकर कटाई तक के हर चरण की तकनीकी बारीकियों के बारे में विस्तार से समझाया। किसानों को बताया गया कि कैसे उचित बीज उपचार और खाद के संतुलित उपयोग से फसल की गुणवत्ता को कई गुना बढ़ाया जा सकता है। तवांग की जलवायु के लिहाज से इस बीज के सकारात्मक परिणामों ने स्थानीय कृषकों के बीच नई उम्मीद जगाई है और पारंपरिक फसलों के प्रति उनका रुझान तेजी से बढ़ रहा है। पहाड़ी इलाकों में भौगोलिक कठिनाइयों के कारण पारंपरिक खेती हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है, लेकिन आधुनिक कृषि विज्ञान इन बाधाओं को पार करने में मददगार साबित हो रहा है। कार्यक्रम के दौरान कृषि अधिकारियों ने किसानों को मिट्टी की जांच कराने, समय पर सिंचाई करने और खरपतवार प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी प्रशिक्षित किया। मंडुआ न केवल एक पोषक अनाज है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को झेलने में भी पूरी तरह सक्षम फसल मानी जाती है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी इसके फायदों को देखते हुए बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिसका सीधा लाभ अब तवांग के किसानों को मिलने की उम्मीद है।

भविष्य की योजनाएं और किसानों की प्रतिक्रिया

स्थानीय कृषकों ने इस तकनीकी सत्र में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और उन्नत खेती के तौर-तरीकों को सीखने में गहरी रुचि दिखाई। किसानों का मानना है कि इस तरह के मार्गदर्शन कार्यक्रमों से उन्हें अपनी आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक अपनाने का सुनहरा अवसर मिल रहा है। प्रशासन और कृषि विभाग की यह पहल आने वाले समय में तवांग को मिलेट उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र बनाने में मील का पत्थर साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में जिले के अन्य गांवों में भी ऐसे जागरूकता शिविर आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि अधिक से अधिक किसानों तक इन उन्नत तकनीकों का लाभ पहुंचाया जा सके और क्षेत्रीय कृषि को और अधिक समृद्ध बनाया जा सके।
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