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मानसून की चिंता खत्म: देवघर के किसानों ने डीएसआर तकनीक अपनाकर धान की खेती में लाई क्रांति

झारखंड के देवघर जिले में किसानों ने धान की खेती के पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर एक नई और आधुनिक तकनीक को अपनाया है, जिससे खेती की तस्वीर ही बदल गई है।

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Kantap News डेस्क
12 अग 2026, 18:09
मानसून की चिंता खत्म: देवघर के किसानों ने डीएसआर तकनीक अपनाकर धान की खेती में लाई क्रांति
झारखंड के कृषि क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां देवघर के किसानों ने मानसून की अनिश्चितता से पार पाने के लिए डायरेक्ट सीडेड राइस यानी डीएसआर तकनीक का रुख किया है। पारंपरिक धान रोपाई के तरीकों के मुकाबले इस आधुनिक तकनीक ने किसानों के सामने आने वाली कई बड़ी चुनौतियों को आसान कर दिया है। कम पानी की उपलब्धता और समय पर बारिश न होने की चिंता के बीच इस विधि ने खेती को नया संबल प्रदान किया है।

लागत में भारी कमी और बचत

इस नई पद्धति को अपनाने से किसानों को खेती में होने वाले भारी खर्च से राहत मिल रही है। पारंपरिक रूप से धान के बिछड़े तैयार करने और फिर खेतों में उनकी रोपाई करने में भारी मात्रा में पानी और श्रम की आवश्यकता होती थी, जिससे लागत काफी बढ़ जाती थी। इसके विपरीत, डीएसआर तकनीक के जरिए सीधे खेतों में बीजों की बुवाई की जाती है, जिससे सिंचाई के पानी के साथ-साथ मजदूरों पर होने वाले खर्च में भी भारी बचत दर्ज की जा रही है। स्थानीय कृषि जानकारों का मानना है कि इस तरह के आधुनिक तौर-तरीके आने वाले समय में राज्य के अन्य हिस्सों के किसानों के लिए भी एक मजबूत मिसाल पेश करेंगे। देवघर के अन्नदाताओं ने जिस प्रकार नई तकनीक को अपनाकर अपनी आय और फसल की स्थिति को सुधारा है, वह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दे रहा है।
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