सस्ते आईपीओ में बेहतर प्रदर्शन
जनवरी से अगस्त 2026 के बीच मुख्य बाजार में सूचीबद्ध हुए आईपीओ का विश्लेषण करने पर स्पष्ट है कि कम मूल्यांकन वाले शेयरों ने निवेशकों की झोली भरी है। जिन निवेशकों ने लिस्टिंग के बाद भी अपने शेयर बेचे नहीं और उनमें बने रहे, उन्हें औसतन 45.4 फीसदी का मुनाफा मिला है। आंकड़े बताते हैं कि 20 गुना से कम कीमत-कमाई अनुपात वाले 12 निर्गमों ने यह उपलब्धि हासिल की है। सूचीबद्धता के दिन ये शेयर औसतन 5.3 फीसदी प्रीमियम पर खुले थे, लेकिन उसके बाद उनमें 35.2 फीसदी की बड़ी उछाल दर्ज की गई। इनमें से नौ कंपनियों ने अपनी पूंजी जुटाने के लिए नए शेयरों का सहारा लिया था, जिन्होंने 51.3 फीसदी तक का औसत रिटर्न दिया है। इस वर्ष जिन निवेशकों ने नए जारी हुए शेयरों पर भरोसा जताया और उन्हें लंबे समय तक होल्ड करके रखा, उन्हें बाजार की अस्थिरता के बीच भी अच्छा लाभ मिला है।
ऊंचे मूल्यांकन वाले शेयरों की हकीकत
बड़ी वैल्यूएशन वाले इश्यू ने भले ही शुरुआत में निवेशकों को लुभाया, लेकिन लंबी दौड़ में वे पिछड़े नजर आए। 30 से 50 गुना कमाई वाली कंपनियों ने शुरुआत में 23.2 फीसदी प्रीमियम के साथ आगाज किया, जिससे कुल 58.8 फीसदी रिटर्न मिला, लेकिन लिस्टिंग के बाद इनमें केवल 10.5 फीसदी की ही बढ़त देखी गई। फंड मैनेजर अभय अग्रवाल के अनुसार, जिन आईपीओ में केवल मौजूदा शेयरधारकों द्वारा हिस्सेदारी बेची जाती है, वहां निवेशकों के लिए बहुत अधिक मुनाफा कमाने की गुंजाइश नहीं बचती। इंडो-एमआईएम और शैडोफैक्स टेक्नॉलजीज जैसे शेयरों ने इस श्रेणी में अच्छा काम किया, जबकि एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट और फ्रैक्टल एनालिटिक्स अपने पेशकश मूल्य से नीचे ट्रेड कर रहे हैं। इन कंपनियों में ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस का हिस्सा बहुत ज्यादा था, जिसके चलते प्रवर्तक या निजी निवेशक अपना मुनाफा लेकर बाहर निकल गए और आम निवेशकों के लिए बाद में बहुत कम जगह बची।
निवेशकों के लिए बाजार के सबक
बाजार के आंकड़ों का गहराई से अध्ययन करने पर पता चलता है कि 100 गुना से ज्यादा महंगे इश्यू निवेशकों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। ऐसे तीन आईपीओ ने औसतन केवल 20.8 फीसदी का रिटर्न दिया, जो सभी श्रेणियों में सबसे कम है। लीप इंडिया जैसा शेयर अपनी पेशकश कीमत से भी 13.5 फीसदी नीचे कारोबार करता देखा गया है। दूसरी ओर, टेक्नोक्राफ्ट वेंचर्स जैसे सस्ते इश्यू ने 127.1 फीसदी रिटर्न देकर यह साबित किया कि कम पीई मल्टीपल और नए शेयरों में निवेश करना ज्यादा सुरक्षित है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल ऊंचे पीई मल्टीपल को देखकर निवेश का फैसला नहीं लेना चाहिए, बल्कि कंपनी की विकास दर और उसके पीछे के ठोस कारणों को भी परखना जरूरी है। भविष्य के लिए यह एक महत्वपूर्ण सबक है कि लिस्टिंग के दिन दिखने वाली चकाचौंध के बजाय कंपनी की वास्तविक क्षमता और उसके इश्यू के स्वरूप को समझना ज्यादा फायदेमंद साबित होता है।