बाजार में सकारात्मक शुरुआत के संकेत
शेयर बाजार के निवेशकों को सप्ताह के पहले कारोबारी दिन यानी सोमवार को सकारात्मक शुरुआत की उम्मीद है। गिफ्ट निफ्टी से मिल रहे संकेत बाजार के लिए राहत लेकर आए हैं। हालांकि, एशियाई बाजारों में दिख रही कमजोरी ने निवेशकों के बीच सतर्कता बनाए रखी है। पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार ने लगातार आठ हफ्तों से जारी गिरावट के दौर को पीछे छोड़ दिया है और मजबूती के साथ बंद हुआ है। बाजार के निवेशकों के लिए यह एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। पिछले हफ्ते की क्लोजिंग ने बाजार में नई ऊर्जा का संचार किया है। अब निवेशकों की नजर सोमवार की ओपनिंग पर टिकी है कि बाजार इस सकारात्मक लय को किस तरह बरकरार रख पाता है। बाजार में चल रही इन गतिविधियों के बीच हर छोटा बदलाव निवेशकों के लिए अहम है। सोमवार को होने वाली ट्रेडिंग यह तय करेगी कि बाजार का रुख आगे कैसा रहेगा और निवेशक किस तरह की रणनीति अपनाते हैं।
सेंसेक्स और निफ्टी की साप्ताहिक चाल
बीते सप्ताह के अंत तक बाजार में अच्छी रौनक देखने को मिली थी। सेंसेक्स 0.78 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72,472.33 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं, निफ्टी सूचकांक ने 0.44 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की और 22,520.45 के स्तर पर अपनी क्लोजिंग दी। बाजार के इस सुधार में कंपनियों द्वारा जारी किए गए सकारात्मक अपडेट्स और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन कारकों ने निवेशकों का भरोसा वापस लाने में मदद की है। पिछले सप्ताह के अंतिम दिनों में बाजार में दिखाई दी यह स्थिरता निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत थी। हालांकि, बाजार का यह सुधार एक ऐसे समय में आया है जब मौद्रिक नीतियों को लेकर कई तरह की चिंताएं बनी हुई हैं। कंपनियों के वित्तीय परिणामों और वैश्विक बाजार के रुख के बीच सेंसेक्स और निफ्टी ने अपनी स्थिति को संभालने का प्रयास किया है, जिससे निवेशकों को सोमवार के कारोबार के प्रति कुछ हद तक आशावादी बनाया है।
आरबीआई की मौद्रिक नीति और बाजार का भविष्य
भारतीय शेयर बाजार में अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक की सख्त मौद्रिक नीति को लेकर घबराहट का माहौल बना हुआ है। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.50 प्रतिशत के स्तर पर पहुंचा दिया है। रेपो रेट में हुई इस वृद्धि ने कर्ज लेने की लागत को बढ़ा दिया है, जिसका असर कंपनियों की कार्यप्रणाली और मुनाफे पर पड़ रहा है। यही मुख्य कारण है कि बाजार के निवेशक अभी भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं और सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से बाजार में तरलता प्रभावित होती है, जिससे शेयर की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहता है। हालांकि पिछले सप्ताह बाजार ने आठ हफ्तों की गिरावट का सिलसिला तोड़कर कुछ राहत जरूर दी है, लेकिन मौद्रिक सख्ती का असर अभी भी बाजार के सेंटिमेंट पर हावी है। आने वाले दिनों में बाजार की चाल काफी हद तक आरबीआई के आगामी रुख और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी। निवेशक अब पूरी सावधानी के साथ आगे बढ़ने की योजना बना रहे हैं।