सोलर मशीनों से बदल रही है तस्वीर
उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले के ग्रामीण अंचलों में महिलाएं अब अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए लगातार आगे आ रही हैं। यहां की महिलाओं ने स्वरोजगार की दिशा में एक नया कदम बढ़ाते हुए अपने खुद के काम की शुरुआत की है। इस बदलाव के पीछे मुख्य भूमिका सोलर ऊर्जा की है जो इन दिनों ग्रामीण इलाकों में जीवन को आसान बना रही है। स्थानीय स्तर पर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई महिलाएं आगे आ रही हैं और विभिन्न प्रकार के व्यवसायों से जुड़ रही हैं। इन महिलाओं ने समूह से छोटी राशि का ऋण प्राप्त किया है और उसी पैसे से अपने कारोबार की नींव रखी है। वर्तमान समय में ये महिलाएं अपने इन व्यवसायों के जरिए हर महीने अच्छी खासी कमाई कर रही हैं और अपने परिवार के पालन-पोषण में पूरा सहयोग दे रही हैं। अयोध्या के विभिन्न क्षेत्रों में इस प्रकार के छोटे व्यवसायों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी एक नया बल मिल रहा है। महिलाएं अब किसी पर भी आर्थिक रूप से निर्भर रहने के बजाय खुद अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं। इस पूरी प्रक्रिया में स्वयं सहायता समूह इन महिलाओं के लिए एक बहुत बड़ा संबल बनकर उभरे हैं जो समय पर इन्हें वित्तीय सहायता और अन्य जरूरी मार्गदर्शन उपलब्ध करा रहे हैं।
विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं का सफर
गोसाईगंज विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले हैदरगंज ब्लॉक की निवासी आरती ने इस दिशा में एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। उन्होंने स्वयं सहायता समूह से तीस हजार रुपये का ऋण लिया और अपने क्षेत्र में सोलर मशीन की स्थापना करवाई। आरती बताती हैं कि पहले के समय में बारिश के दिनों में अक्सर बिजली कट जाती थी जिसके कारण उनका सारा काम बीच में ही रुक जाता था। लेकिन अब सोलर मशीन के आ जाने से दिन के समय में आटा पीसने का कार्य तथा तेल निकालने का काम बहुत ही आसानी से पूरा हो जाता है। इस व्यवसाय के माध्यम से उन्हें हर महीने लगभग पंद्रह से बीतीस हजार रुपये तक की आमदनी प्राप्त हो जाती है। इसके अलावा उन्होंने अपने यहां एक अन्य व्यक्ति को भी रोजगार दे रखा है जो उनके काम में हाथ बंटाता है। अयोध्या के ही मिल्कीपुर क्षेत्र के कहुआ गांव की रहने वाली देवकी दुबे की कहानी भी कुछ इसी तरह की प्रेरणादायक है। उन्होंने समूह की अन्य महिलाओं से इस योजना के बारे में पूरी जानकारी हासिल की और तीस हजार रुपये उधार लेकर अपनी मशीन चालू की। देवकी घर की सभी जिम्मेदारियों को बहुत अच्छे से संभालते हुए अपने इस कारोबार को पूरी सफलता के साथ चला रही हैं। उनकी सास क्रांति देवी भी इस काम में उनका पूरा साथ देती हैं और दोनों मिलकर इस व्यवसाय को आगे बढ़ा रही हैं। क्रांति देवी के यहां भी आटा पीसने और तेल निकालने का कार्य किया जाता है जिससे हर महीने अच्छी आय हो जाती है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती
पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए ये महिलाएं आज के समय में समाज में एक मिसाल बन चुकी हैं। क्रांति देवी और देवकी दुबे का पूरा परिवार इस कार्य में उनका सहयोग करता है जिससे काम और भी सुचारू रूप से चलता है। उनके घर के सदस्यों ने एक गाय भी पाल रखी है जिसके दूध को बाजार में बेचकर वे लोग अतिरिक्त कमाई कर लेते हैं। इस तरह की अतिरिक्त आय होने से घर का रोजाना का खर्च चलाने में तथा बच्चों की सभी प्रकार की जरूरतें पूरी करने में बहुत मदद मिलती है। पहले के समय में बिजली की आंख मिचौली के कारण काम बहुत अधिक प्रभावित होता था और समय पर काम पूरा नहीं हो पाता था। लेकिन सोलर मशीन की सुविधा मिलने के बाद से इन सभी समस्याओं से पूरी तरह से निजात मिल चुकी है। ये सभी महिलाएं केवल अपने तक ही सीमित नहीं हैं बल्कि वे गांव की दूसरी महिलाओं को भी इस योजना के बारे में विस्तार से बताती हैं। वे अन्य महिलाओं को समूह की बैठकों में शामिल होने और सोलर मशीनों के जरिए अपना खुद का रोजगार शुरू करने के लिए लगातार प्रेरित करती हैं। इन सभी कहानियों से यह स्पष्ट रूप से सामने आता है कि सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर मिलने वाली ये छोटी सहायताएं किस प्रकार ग्रामीण परिवेश की तस्वीर को पूरी तरह से बदलने का माद्दा रखती हैं।