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उज्जैन में नकली दवा बनाने वाले नेटवर्क पर यूपी एफएसडीए की बड़ी कार्रवाई

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Administrator
03 सित 2026, 20:29
उज्जैन में नकली दवा बनाने वाले नेटवर्क पर यूपी एफएसडीए की बड़ी कार्रवाई

Lucknow Desk : नकली और अवैध दवाओं के खिलाफ उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की कार्रवाई अब दूसरे राज्यों तक पहुंच गई है। लखनऊ में दर्ज एक मामले की जांच करते हुए यूपी एफएसडीए और पुलिस की टीम मध्य प्रदेश के उज्जैन पहुंची। यहां स्थानीय औषधि प्रशासन, आयुष विभाग और पुलिस के साथ मिलकर की गई कार्रवाई में नकली दवा बनाने वाले एक अंतरराज्यीय नेटवर्क का पता चला। जांच के दौरान उज्जैन के न्यू इंडस्ट्रियल एरिया, आगर रोड स्थित मेसर्स रुद्राया फार्मा पर छापा मारा गया। मौके पर फर्म संचालक प्रेम मलिक और उसका बेटा राहुल मलिक उर्फ रितिक मिले। जांच में पता चला कि फर्म के पास आयुर्वेदिक दवाएं बनाने का लाइसेंस था, लेकिन इसी लाइसेंस की आड़ में एलोपैथिक दवा LEVERA-500 तैयार की जा रही थी। पूछताछ में सामने आया कि प्रेम मलिक पिछले करीब 8 से 10 साल से सहारनपुर निवासी एजाज अहमद के संपर्क में था। एजाज के कहने पर LEVERA-500 में इस्तेमाल होने वाला एक्टिव इनग्रेडिएंट Levetiracetam IP मुंबई की कुछ फर्मों से मंगाया जाता था। इसके बाद उज्जैन की फैक्ट्री में टैबलेट तैयार की जाती थीं।

जांच में यह भी जानकारी मिली कि दवा की पैकिंग के लिए जरूरी प्रिंटेड पैकिंग मैटेरियल एजाज अहमद उपलब्ध कराता था। अब तक करीब 4.80 लाख टैबलेट, यानी लगभग 32 हजार स्ट्रिप्स तैयार कर प्राइवेट बसों के जरिए हरिद्वार भेजे जाने की बात सामने आई है। इसके बदले भुगतान नकद और ऑनलाइन दोनों तरीकों से किया जाता था। लखनऊ में नकली दवाओं के मामले में एफआईआर दर्ज होने की जानकारी मिलने के बाद आरोपियों ने सबूत मिटाने की कोशिश भी की। पूछताछ के अनुसार बची हुई दवाओं, पैकिंग मैटेरियल, चेंज पार्ट्स और डाई-पंच को नष्ट कर दिया गया। दवा की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली हाईटेक Alu-Alu मशीन को भी देवास में एक जगह छिपा दिया गया था। छापेमारी के दौरान फैक्ट्री की छत से 5,250 बिना लेबल वाली संदिग्ध ग्लास वायल भी मिलीं। इन्हें सात कार्टन में सील कर दिया गया। इनके नमूने जांच के लिए राजकीय प्रयोगशाला भेजे गए हैं। आयुष विभाग की टीम ने फैक्ट्री से आठ आयुर्वेदिक दवाओं के नमूने भी लिए हैं।

अधिकारियों ने फैक्ट्री से खरीद-बिक्री के बिल, इनवॉइस, मोबाइल स्क्रीनशॉट और अन्य दस्तावेज भी सुरक्षित किए हैं। इन सबूतों के आधार पर दवा बनाने से लेकर उसकी पैकिंग, सप्लाई और भुगतान तक की पूरी कड़ी की जांच की जा रही है। यह कार्रवाई लखनऊ के अमीनाबाद थाने में 12 अगस्त 2026 को दर्ज एफआईआर से आगे बढ़ी। गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर जांच टीम उज्जैन तक पहुंची। अब यूपी एफएसडीए की नजर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी है। अधिकारियों का कहना है कि नकली दवाओं के मामलों में केवल एक फैक्ट्री या कारोबारी पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। दवा कहां बनी, कच्चा माल कहां से आया, पैकिंग किसने कराई, माल किस रास्ते से पहुंचा और भुगतान किस तरह हुआ। इन सभी पहलुओं की जांच जरूरी है। मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए विभाग दूसरे राज्यों के अधिकारियों और पुलिस के साथ मिलकर ऐसे नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा।

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