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वैश्विक बाजार का रास्ता: उत्तर प्रदेश के एमएसएमई को जर्मनी से मिलेगा बड़ा सहारा, मंत्री भूपेंद्र चौधरी से मिले प्रतिनिधिमंडल

उत्तर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहुंच मजबूत करने का बड़ा अवसर मिलने जा रहा है। हाल ही में एक प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री भूपेंद्र चौधरी से मुलाकात कर इस संबंध में चर्चा की है।

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Ankit Yadav
04 सित 2026, 15:40
वैश्विक बाजार का रास्ता: उत्तर प्रदेश के एमएसएमई को जर्मनी से मिलेगा बड़ा सहारा, मंत्री भूपेंद्र चौधरी से मिले प्रतिनिधिमंडल
उत्तर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई सेक्टर के लिए आने वाला समय बेहद सुनहरा साबित हो सकता है। राज्य के स्थानीय कारोबारियों और पारंपरिक शिल्पकारों के उत्पादों को अब अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए एक नया और मजबूत जरिया मिलने वाला है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रमुख नेता और मंत्री भूपेंद्र चौधरी से मुलाकात की है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में तैयार होने वाले सामानों को सीधे जर्मनी जैसे विकसित यूरोपीय राष्ट्र के बाजारों तक सुगम तरीके से पहुंचाना था।

वैश्विक स्तर पर बढ़ेगी यूपी के उत्पादों की चमक

राज्य सरकार लगातार यह प्रयास कर रही है कि प्रदेश के छोटे और मझोले उद्योगों को वैश्विक फलक पर अपनी पहचान बनाने के लिए उचित मंच मिले। जर्मनी के बाजारों तक पहुंच बनने से न केवल यहां के कारोबारियों की आय में भारी इजाफा होगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उत्तर प्रदेश में ओडीओपी यानी एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत कई ऐसी वस्तुएं बनाई जाती हैं जिनकी मांग पूरी दुनिया में है। इस प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई उच्चस्तरीय चर्चा के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक अनुबंधों और आधुनिक तकनीकों के आदान-प्रदान को लेकर ठोस कदम उठाए जाएंगे। मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार से उत्तर प्रदेश के उद्यमियों को हर संभव सहायता मुहैया कराई जा रही है ताकि वे वैश्विक मानकों पर खरा उतर सकें। आधुनिक गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों की जानकारी से स्थानीय स्तर के कारीगरों को लैस करने की योजनाओं पर भी विचार विमर्श किया गया है। स्थानीय उत्पादों की वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए बुनियादी ढांचे को और अधिक मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

आने वाले दिनों में नजर आएंगे सकारात्मक परिणाम

विशेषज्ञों का मानना है कि जर्मनी के बाजारों का दरवाजा खुलने से उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक नई गति मिलेगी। यूरोपीय देशों में हस्तशिल्प, चमड़ा उत्पाद, वस्त्र और इंजीनियरिंग सामानों की भारी मांग रहती है, जिसे यूपी के एमएसएमई आसानी से पूरा कर सकते हैं। इस दिशा में हुई शुरुआती बैठकों के बाद अब संबंधित विभागों द्वारा आगे की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि बहुत जल्द ही जमीनी स्तर पर इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे, जिससे राज्य के लाखों छोटे उद्यमियों को सीधा लाभ पहुंचेगा और प्रदेश की आर्थिकी को एक नई ऊंचाई मिलेगी।
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