झांसी में अवैध सिगरेट फैक्ट्री का भंडाफोड़
उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में कानून लागू करने वाले अधिकारियों ने एक अवैध फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है जहाँ बाजार में बिकने वाले प्रसिद्ध ब्रांडों के नाम पर नकली सिगरेट तैयार की जा रही थी। इस मामले में पुलिस ने उन्नाव जिले के अचलगंज क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अटवा बंथर इलाके के रहने वाले श्रीनिवास मिश्रा को हिरासत में ले लिया है। मुख्य आरोपी झांसी शहर की अंसल पाम कालोनी में एक घर किराए पर लेकर रह रहा था और वहीं से इस गैरकानूनी गतिविधि को अंजाम दे रहा था। इस बड़ी कार्रवाई के दौरान पुलिस बल ने मौके से करीब दो करोड़ रुपये मूल्य की सामग्री जब्त की है। अधिकारियों को मुखबिर से और कंपनी के प्रतिनिधियों की तरफ से मिली औपचारिक जानकारी के आधार पर यह कदम उठाया गया है। पुलिस ने इस पूरी कार्रवाई को गुप्त सूचना के पुख्ता होने के बाद अंजाम दिया ताकि आरोपियों को संभलने का मौका न मिल सके। मौके पर मौजूद सभी मशीनों और उपकरणों को भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है जिनका उपयोग इस अवैध उत्पादन के लिए किया जा रहा था। इस तरह की अवैध गतिविधियों से सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान होता है और आम जनता के स्वास्थ्य के साथ भी गंभीर खिलवाड़ किया जाता है। स्थानीय पुलिस अब इस पूरे मामले की गहनता से छानबीन कर रही है ताकि इस अवैध नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के चेहरों से भी पर्दा उठाया जा सके।
कंपनी की शिकायत पर पुलिस की छापेमारी
आईटीसी लिमिटेड कंपनी के एक प्रतिनिधि ऋषु मिश्रा ने इस गैरकानूनी निर्माण के संबंध में गत 18 अक्टूबर को पुलिस के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत मिलने के तुरंत बाद सक्रिय हुई पुलिस टीम ने कंपनी के अन्य प्रतिनिधियों को साथ लेकर गुमनावारा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले महाराणा प्रताप नगर में स्थित एक गोदाम और फैक्ट्री पर अचानक छापा मारा। इस औचक निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि वहाँ आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर सिगरेट तैयार की जा रही थी। मौके पर की गई शुरुआती जाँच में यह बात सामने आई कि गोल्ड फ्लैक ब्रांड के पचास पैकेट वाले एक डिब्बे के अंदर मौजूद सभी सिगरेट पूरी तरह से नकली थीं। इस अवैध कारोबार को पिछले लगभग तीन महीनों से लगातार चलाया जा रहा था और इसकी आड़ में बड़े पैमाने पर नकली उत्पादों की बिक्री बाजार में की जा रही थी। जांच के दौरान यह भी पता चला कि आरोपी सप्ताह के अंत यानी शनिवार और रविवार को विशेष रूप से उत्पादन का काम करते थे। इसके बाद तैयार किए गए सारे माल की सप्लाई रविवार की रात को तय ठिकानों पर की जाती थी ताकि किसी को शक न हो। छापे के वक्त उस स्थान पर कुल सात मजदूर भी काम करते मिले जिनसे पुलिस अधिकारियों ने लंबी पूछताछ की। पूछताछ के बाद उन सभी मजदूरों को फिलहाल छोड़ दिया गया क्योंकि उनकी मुख्य संलिप्तता के पुख्ता प्रमाण मौके पर नहीं मिले थे।
आरोपी की गिरफ्तारी और आगे की जाँच
एसएसपी विकास कुमार ने इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि मुख्य आरोपी श्रीनिवास मिश्रा को गिरफ्तार करके जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस अब इस बात का पता लगाने में जुटी है कि यह नकली माल कहाँ-कहाँ सप्लाई किया जाता था और इस रैकेट के तार किन अन्य लोगों से जुड़े हुए हैं। इस अवैध कारखाने के पकड़े जाने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा में नकली सामान का बनना एक बहुत बड़ा अपराध है। कानून के जानकारों का मानना है कि इस तरह के मामलों में संलिप्त पाए जाने वाले अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की टीमें अब उस सप्लाई नेटवर्क को खंगाल रही हैं जिनके जरिए इन नकली उत्पादों को बाजार के दुकानदारों तक पहुँचाया जाता था। इस पूरी कार्रवाई से यह संदेश गया है कि ब्रांडेड सामानों की नकल करने वालों के खिलाफ प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है और किसी भी सूरत में ऐसे अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं क्योंकि पुलिस हर एक पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही है। पकड़े गए आरोपी से पूछताछ के आधार पर उन गोदामों और दुकानों की भी पहचान की जा रही है जहाँ यह माल खपाया जाता था। इस तरह से झांसी पुलिस ने एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करके उपभोक्ताओं को बड़े धोखे से बचाने का सराहनीय काम किया है।