वाराणसी में दवा विक्रेता के साथ बड़ी साइबर धोखाधड़ी
वाराणसी जिले में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें एक दवा विक्रेता को अपने बैंक खाते से हाथ धोना पड़ा है। अपराधियों ने बहुत ही सुनियोजित तरीके से इस घटना को अंजाम दिया है। पीड़ित दवा विक्रेता के भतीजे का व्हाट्सएप अकाउंट सबसे पहले जालसाजों ने अपने नियंत्रण में लिया। इस हैकिंग के बाद, संदिग्धों ने उसी व्हाट्सएप से एक हानिकारक एपीके फाइल दवा विक्रेता को भेजी। जैसे ही विक्रेता ने उस फाइल को अपने मोबाइल फोन पर खोला, जालसाजों ने उसके बैंक खाते तक पहुंच बना ली। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पीड़ित को यह एहसास तक नहीं हुआ कि वह किसी बड़े जाल में फंस रहा है। देखते ही देखते खाते से 7.30 लाख रुपये की राशि गायब हो गई। यह घटना आज 22 अक्टूबर 2026 को सामने आई है और इसने स्थानीय व्यापारियों के बीच हड़कंप मचा दिया है। पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए सक्रिय हो गई है और मामले में विधिवत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
व्हाट्सएप हैक और एपीके फाइल का घातक खेल
इस धोखाधड़ी की पूरी कार्यप्रणाली बेहद तकनीकी और खतरनाक है, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी आजकल आम लोगों को फंसाने के लिए कर रहे हैं। जालसाजों ने पहले पीड़ित के भतीजे का व्हाट्सएप हैक किया, जिससे संदेश मिलने वाले व्यक्ति को लगा कि यह पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद है। एपीके फाइल एक प्रकार का एंड्रॉइड एप्लिकेशन पैकेज है, जिसे इंस्टॉल करने के बाद अपराधी व्यक्ति के फोन का पूरा रिमोट एक्सेस प्राप्त कर सकते हैं। फाइल खोलते ही मोबाइल की सुरक्षा दीवारें टूट गईं और जालसाजों ने बैंक विवरण व ओटीपी तक पहुंच हासिल कर ली। इस प्रकार के हमलों में अक्सर पीड़ितों के फोन से निजी जानकारी चुराई जाती है और फिर वित्तीय ट्रांजेक्शन किए जाते हैं। दवा विक्रेता को जब खाते से पैसे कटने की सूचना मिली, तब तक काफी देर हो चुकी थी। अब जांच अधिकारी इस बात का पता लगा रहे हैं कि यह गिरोह कहां से संचालित हो रहा है और इस राशि को किस खाते में ट्रांसफर किया गया है। अधिकारियों ने दवा विक्रेता के बयान दर्ज किए हैं और डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है ताकि अपराधियों तक पहुंचा जा सके।
साइबर सुरक्षा और बढ़ते डिजिटल अपराधों का खतरा
साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि अनजान एपीके फाइलें खोलना वर्तमान समय में सबसे बड़ी डिजिटल भूल साबित हो रही है। इस प्रकार की घटनाएं केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक समस्या बन चुकी हैं। किसी भी अनजान लिंक या फाइल को इंस्टॉल करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना अनिवार्य है। विशेष रूप से उन मामलों में जहां कोई परिचित व्यक्ति अचानक से कोई फाइल भेजे, वहां सतर्कता बरतना जरूरी है क्योंकि व्हाट्सएप हैकिंग के जरिए अपराधियों का विश्वास जीतना आसान होता है। आम लोगों को सलाह दी जाती है कि वे अपने मोबाइल और बैंकिंग एप्स के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करें। पुलिस का कहना है कि वे इस मामले में त्वरित कार्रवाई कर रहे हैं ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के प्रयास किए जा रहे हैं। बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों में समय पर शिकायत दर्ज कराना महत्वपूर्ण होता है, ताकि बैंक के साथ समन्वय करके खाते को फ्रीज कराया जा सके और संभावित नुकसान को कम किया जा सके। कानून प्रवर्तन एजेंसियां अब इस डिजिटल जालसाजी के पीछे के मास्टरमाइंड की तलाश कर रही हैं।