सैयदराजा क्षेत्र में गोवंश तस्करी का खुलासा
चंदौली जिले की सैयदराजा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गोवंश की तस्करी के प्रयास को नाकाम किया है। यह पूरी घटना एनएच-2 हाइवे की है, जहां पुलिस की टीम ने मुखबिर की सटीक सूचना के आधार पर जाल बिछाया था। भगवानपुर पुल के पास पुलिस ने चेकिंग के दौरान वाहन संख्या UP67BT 7366 को रुकने का इशारा किया। पिकअप की तलाशी लेने पर उसके भीतर पांच गोवंश लदे हुए मिले, जिन्हें बेरहमी से वध के लिए ले जाया जा रहा था। पुलिस टीम ने तुरंत प्रभाव से वाहन को अपने कब्जे में लिया और गोवंश को सुरक्षित बाहर निकाला। इस सफलता में थानाध्यक्ष अशोक कुमार मिश्र और उपनिरीक्षक सुनील कुमार के नेतृत्व वाली पुलिस टीम ने मुख्य भूमिका निभाई। पुलिस के अनुसार, तस्करों का यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और गोवंश को वध के उद्देश्य से ले जाने की फिराक में था। क्षेत्र में गश्त के दौरान मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस तस्करी को सफल होने से पहले ही रोक दिया है। यह कार्रवाई गोवंश संरक्षण के प्रति पुलिस की सख्ती को दर्शाती है।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान और मामला
पुलिस हिरासत में लिए गए दोनों तस्करों की पहचान अलीनगर थाना क्षेत्र के निवासी सुजीत कुमार बिंद और देवी शरण बिंद के रूप में हुई है। पूछताछ में सामने आया कि सुजीत कुमार बिंद वाहन का चालक है, जबकि देवी शरण बिंद उक्त पिकअप का मालिक है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ गोवध निवारण अधिनियम और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत गंभीर मामला दर्ज किया है। आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत न्यायालय के समक्ष पेश करने की तैयारी की जा रही है। पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि पकड़े गए दोनों तस्कर सुनियोजित तरीके से इस काम को अंजाम देने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने वाहन को सीज कर लिया है और बरामद किए गए पांचों गोवंश को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की प्रक्रिया शुरू की है। इस पूरे मामले में थाना पुलिस की सतर्कता के कारण एक बड़ा आपराधिक कृत्य होने से पहले ही टल गया है। अधिकारी अब इस गिरोह से जुड़े अन्य संपर्कों और गोवंशों के अंतिम गंतव्य के बारे में गहन छानबीन कर रहे हैं ताकि नेटवर्क को तोड़ा जा सके।
अपराधी का पुराना इतिहास और कानूनी कार्रवाई
इस मामले के मुख्य आरोपी सुजीत कुमार बिंद का पहले से ही एक लंबा आपराधिक इतिहास रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सुजीत के खिलाफ मिर्जापुर और वाराणसी जिले में भी गोवध निवारण अधिनियम के तहत मुकदमे पहले से दर्ज हैं। यह तथ्य साबित करता है कि आरोपी पहले भी इस तरह के अवैध कार्यों में संलिप्त रहा है और अपनी गतिविधियों से बाज नहीं आ रहा था। उसके खिलाफ बार-बार मामले दर्ज होने के बावजूद, वह फिर से गो तस्करी के इस अपराध में शामिल पाया गया है। पुलिस अब इन सभी पुराने मामलों को संज्ञान में लेकर सख्त कानूनी सजा दिलाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस घटना से स्थानीय नागरिकों में आक्रोश है, जो गोवंश की तस्करी जैसी गतिविधियों पर पूर्ण रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गोवंश तस्करी में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे सभी अपराधियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी। पुलिस का कहना है कि वे इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि ये गोवंश कहां से लाए गए थे और इन्हें किन लोगों को सौंपा जाना था ताकि पूरे रैकेट का पर्दाफाश किया जा सके।