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डिजिटल अरेस्ट का खेल: सीबीआई ने किया सिमबॉक्स नेटवर्क का पर्दाफाश, फिंगरप्रिंट आपका और सिम किसी और का

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बड़े साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल अरेस्ट के खेल का भंडाफोड़ किया है, जिसमें सिमबॉक्स नेटवर्क के जरिए बड़े पैमाने पर ठगी की जा रही थी। इस गोरखधंधे में हैरान करने वाली बात यह है कि मोबाइल सिम कार्ड किसी और के नाम और फिंगरप्रिंट पर जारी होते हैं, जबकि उनका इस्तेमाल अपराधी करते हैं।

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Ankit Yadav
14 सित 2026, 10:19
डिजिटल अरेस्ट का खेल: सीबीआई ने किया सिमबॉक्स नेटवर्क का पर्दाफाश, फिंगरप्रिंट आपका और सिम किसी और का
देशभर में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराधों और डिजिटल अरेस्ट के मामलों पर केंद्रीय जांच ब्यूरो ने एक बड़ा शिकंजा कसा है। जांच एजेंसी के हाथ एक ऐसे शातिर नेटवर्क के तार लगे हैं जो अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके आम नागरिकों को अपना शिकार बना रहा था। इस पूरे खेल में सिमबॉक्स का उपयोग किया जा रहा था, जिससे कॉल्स की लोकेशन और पहचान छिपाना आसान हो जाता था। अधिकारी इस बात की गहराई से छानबीन कर रहे हैं कि आखिर कैसे बिना असली मालिक की जानकारी के बायोमेट्रिक डेटा का दुरुपयोग करके सिम कार्ड जारी किए जा रहे थे।

फिंगरप्रिंट क्लोनिंग और बायोमेट्रिक धोखाधड़ी

साइबर अपराधियों का यह नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। जांच में यह बात सामने आई है कि भोले-भाले नागरिकों के फिंगरप्रिंट या तो क्लोन किए जा रहे थे या फिर अन्य तरीकों से उनका गलत इस्तेमाल करके उनके नाम पर सिम कार्ड खरीदे जा रहे थे। जब पीड़ित व्यक्ति के पास कोई फोन पहुंचता है या कोई धोखाधड़ी होती है, तो पुलिस या जांच एजेंसियों के लिए असली अपराधी तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता है क्योंकि कागजों पर वह सिम किसी निर्दोष व्यक्ति के नाम पर रजिस्टर्ड होता है। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर साइबर ठग फर्जी पुलिस अधिकारी या सरकारी एजेंसी बनकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाते हैं।

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करोड़ों की ठगी

डिजिटल अरेस्ट के इस नए और खतरनाक ट्रेंड में ठग खुद को सीबीआई, कस्टम्स या अन्य बड़ी एजेंसियों का अधिकारी बताते हैं। वे वीडियो कॉल के जरिए लोगों को घंटों तक अपने कैमरे के सामने बंधक जैसी स्थिति में रखते हैं और झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देकर भारी रकम ट्रांसफर करवा लेते हैं। सिमबॉक्स के जरिए किए जाने वाले इन कॉल्स के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैठे रैकेट के मास्टरमाइंड आसानी से बच निकलते हैं। सीबीआई अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने के लिए तकनीकी सर्विलांस और अन्य सुरागों की मदद ले रही है। भविष्य में इस तरह के संगठित साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए दूरसंचार विभाग और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। आम जनता को भी लगातार यह चेतावनी दी जा रही है कि वे किसी भी अज्ञात वीडियो कॉल या डिजिटल अरेस्ट की धमकी से घबराएं नहीं और तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल पर इसकी शिकायत दर्ज कराएं।
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