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डिजिटल अरेस्ट ठगी: भेल से रिटायर्ड इंजीनियर से 48 घंटे में 31 लाख रुपये ठगे

उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में एक गंभीर साइबर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। यहां भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड से सेवानिवृत्त एक इंजीनियर को जालसाजों ने डिजिटल अरेस्ट की आड़ में फंसाया। बदमाशों ने इस बुजुर्ग पीड़ित से करीब 48 घंटे तक संपर्क बनाए रखकर कुल 31 लाख रुपये की भारी रकम ऐंठ ली।

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Ankit Yadav
11 अक्ट 2026, 16:54
डिजिटल अरेस्ट ठगी: भेल से रिटायर्ड इंजीनियर से 48 घंटे में 31 लाख रुपये ठगे

झांसी में साइबर अपराधियों की बड़ी वारदात

साइबर अपराधियों ने झांसी के एक वरिष्ठ नागरिक को अपना निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर अवैध वसूली को अंजाम दिया है। भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड से रिटायर्ड हुए एक इंजीनियर को इन ठगों ने अपनी ऑनलाइन जालसाजी का शिकार बनाया। आरोपियों ने पीड़ित को लगातार अड़तालीस घंटे तक अपनी वर्चुअल निगरानी में रखा जिसे साइबर ठगी की भाषा में डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है। इस पूरी अवधि के दौरान बुजुर्ग पीड़ित अपने ही घर के भीतर इन शातिर अपराधियों के मानसिक दबाव और खौफ के साए में जीने को मजबूर हो गया था। ठगों ने विभिन्न बहानों और डराने वाली तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए पीड़ित के बैंक खातों से कुल इकतीस लाख रुपये की बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली। इस सनसनीखेज घटना के सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस महकमे में और साइबर सेल में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने इस ठगी के पीछे सक्रिय गिरोह की तलाश के लिए अपनी जांच तेज कर दी है। पीड़ित इंजीनियर सदमे की स्थिति में है और उसने पुलिस को अपनी आपबीती विस्तार से बताई है। इस प्रकार की घटनाएं लगातार यह साबित कर रही हैं कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके साइबर अपराधी किस तरह भोले-भाले नागरिकों को चूना लगा रहे हैं।

डिजिटल अरेस्ट के जरिए ऐसे हुई ठगी

घटना के तौर-तरीकों पर गौर करें तो ठगों ने बेहद शातिर तरीके से पीड़ित को कानूनी कार्रवाई का खौफ दिखाया था। आरोपियों ने खुद को किसी बड़ी जांच एजेंसी या कानून प्रवर्तन अधिकारी के रूप में पेश किया और पीड़ित को डराया। उन्होंने वीडियो कॉल या अन्य डिजिटल माध्यमों से लगातार जुड़े रहकर बुजुर्ग इंजीनियर को यह विश्वास दिलाया कि वह गंभीर कानूनी संकट में फंस चुके हैं। उन अड़तालीस घंटों के दौरान पीड़ित को किसी से भी बात करने या घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई थी। लगातार बनाए गए मानसिक दबाव के कारण सेवानिवृत्त इंजीनियर ने अपराधियों के बताए गए विभिन्न बैंक खातों में पैसे जमा करना शुरू कर दिया। इस तरह कुल इकतीस लाख रुपये की भारी-भरकम राशि धीरे-धीरे करके जालसाजों के खातों तक पहुंच गई। जब ठगों ने पूरी रकम वसूल ली और अपना संपर्क काटना शुरू किया तब पीड़ित को अपने साथ हुई बड़ी धोखाधड़ी का अहसास हुआ। इसके बाद तुरंत मामले की सूचना स्थानीय पुलिस और साइबर क्राइम थाने की टीम को दी गई। पुलिस अब उन बैंक खातों के ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड खंगाल रही है जिनमें यह पैसा ट्रांसफर किया गया था ताकि आरोपियों के ठिकानों का पता लगाया जा सके।

बढ़ते साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट का खतरा

वर्तमान समय में देश भर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वाले गिरोहों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। साइबर अपराधी अक्सर सरकारी अधिकारियों या जांच एजेंसियों के फर्जी पहचान पत्र दिखाकर वरिष्ठ नागरिकों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अपना निशाना बनाते हैं। इस तरह के मामलों में ठग लोगों को वीडियो कॉल पर जोड़कर उन्हें यह यकीन दिलाते हैं कि उनके नाम से कोई अवैध पार्सल या मनी लॉन्ड्रिंग का मामला सामने आया है। डर और अज्ञानता के कारण लोग इन जालसाजों के झांसे में आ जाते हैं और अपनी जीवनभर की कमाई उन्हें सौंप देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अपराधों से बचने के लिए नागरिकों को अत्यधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस विभाग फोन या वीडियो कॉल पर किसी को भी डिजिटल रूप से गिरफ्तार नहीं करती है और न ही ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने की मांग करती है। यदि किसी भी नागरिक को इस तरह की संदिग्ध कॉल या धमकियां मिलें तो उसे तुरंत अपनी नजदीकी पुलिस या साइबर हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करना चाहिए। इस ताजा मामले ने एक बार फिर से यह रेखांकित कर दिया है कि ऑनलाइन सुरक्षा के प्रति जागरूकता कितनी आवश्यक है ताकि कोई अन्य व्यक्ति इस प्रकार के साइबर जाल में न फंसे।

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