Lucknow Desk : कानपुर देहात में पेरियार ललई सिंह यादव चैरिटेबल ट्रस्ट ऑफ इंडिया ने कहा कि भारत सरकार द्वारा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए जारी स्पेशल कंपोनेंट प्लान (एससीपी) के बजट से उत्तर प्रदेश के कन्नौज, अंबेडकर नगर, जालौन और सहारनपुर में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की गई थी। ट्रस्ट के मुताबिक, भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार एससीपी के बजट से स्थापित संस्थानों से 70 प्रतिशत अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों को लाभान्वित किया जाना आवश्यक है। इसी व्यवस्था के तहत चारों मेडिकल कॉलेजों में अनुसूचित जाति के लिए 62 और अनुसूचित जनजाति के अपलिफ्टमेंट के लिए 5 एमबीबीएस सीटें निर्धारित की गई थीं।
ट्रस्ट का कहना है कि यह व्यवस्था वर्ष 2011 से लगातार लागू थी। ⏳ इमेज अपलोड हो रही है... ट्रस्ट ने आरोप लगाया कि सरकार की कमजोर पैरवी के कारण पिछले वर्ष न्यायालय ने इसे आरक्षण मानते हुए इस व्यवस्था पर रोक लगा दी। इसके समाधान के लिए प्रदेश सरकार की ओर से कोई अध्यादेश या अधिनियम नहीं लाया गया।
इस वर्ष भी सरकार ने शासनादेश के माध्यम से व्यवस्था लागू करने का प्रयास किया, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में इस मामले में दोबारा हस्तक्षेप किया जा रहा है। ट्रस्ट के अनुसार, इससे अनुसूचित जाति की 176 और अनुसूचित जनजाति की 12, यानी कुल 188 एमबीबीएस सीटों का नुकसान हो सकता है। ट्रस्ट ने सरकार से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण के लिए हाईकोर्ट में मजबूत पैरवी करने और इस संबंध में तत्काल अध्यादेश लाने की मांग की है।