अवैध असलहों की खेप और तस्करी का खुलासा
गोरखपुर और इसके पड़ोसी इलाकों में हथियारों की तस्करी का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक बीते तीन वर्षों में 200 से अधिक पिस्टल अलग-अलग माध्यमों से इस क्षेत्र में पहुंचाई गई हैं। तस्करी के इस बड़े मामले की कड़ियां सोमवार की रात मिर्जापुर निवासी रितेश दत्त त्रिपाठी की गिरफ्तारी के बाद जुड़ीं। रितेश के पास से पुलिस ने दो .32 बोर की पिस्टल बरामद की हैं, जिन्हें उसने प्रयागराज के नैनी निवासी राजू यादव के साथ मिलकर खरीदा था। पुलिस अब इन हथियारों के स्रोत और उनके गंतव्य तक पहुंचने के रास्तों की गहन जांच कर रही है। यह जांच इस बात पर टिकी है कि मध्य प्रदेश के बुरहानपुर और हरियाणा जैसे राज्यों से असलहे किस तरह गोरखपुर तक पहुंच रहे थे। तस्करी में शामिल स्थानीय एजेंटों और खरीदारों की पहचान करने के लिए पुलिस पिछले कई मामलों का रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि नेटवर्क के हर चेहरे को बेनकाब किया जा सके।
जांच का दायरा और संदिग्धों की भूमिका
पुलिस प्रशासन ने इस पूरे तस्करी नेटवर्क को तोड़ने के लिए व्यापक स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। सीओ कैंट अरुण कुमार एस ने स्पष्ट किया है कि जांच का मुख्य उद्देश्य सप्लायर से लेकर खरीदार तक की पूरी कड़ियों को जोड़ना है। रितेश दत्त त्रिपाठी से हुई पूछताछ में बुरहानपुर के सप्लायरों का नाम प्रमुखता से सामने आया है। पुलिस अब राजू यादव की संलिप्तता की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगा रही है कि हथियारों की आपूर्ति किन लोगों को की गई थी। इसके अतिरिक्त, सिक्टौर के एक अज्ञात डॉक्टर की भी पहचान की जा रही है जिसे रितेश हथियार पहुंचाने के लिए गोरखपुर आया था। बरामद की गई पिस्टलों को फॉरेंसिक मिलान के लिए भेजा गया है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या इनका उपयोग पूर्व के किसी आपराधिक मामलों में किया गया है। पुलिस ने जल्द ही इस मामले में कई अन्य लोगों की गिरफ्तारी की संभावना भी जताई है क्योंकि पुराने मामलों के अभियुक्तों के मोबाइल नंबरों का तकनीकी विश्लेषण जारी है।
बिश्नोई-गोल्डी गिरोह से जुड़ाव और भविष्य की रणनीति
हथियार तस्करी के इस मामले में लारेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ गिरोह के संपर्क होने की संभावना ने जांच को और अधिक गंभीर बना दिया है। हाल में गिरफ्तार किए गए कुछ अपराधियों ने पूछताछ के दौरान इन कुख्यात गिरोहों से जुड़े लोगों के साथ अपने संबंधों का खुलासा किया था। पुलिस अब यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि मध्य प्रदेश और हरियाणा से आने वाला असलहा इसी बड़े संगठित नेटवर्क के जरिए पूर्वांचल में खपाया जा रहा था या फिर स्थानीय गिरोह स्वतंत्र रूप से हथियार मंगा रहे थे। इस जांच का सीधा संबंध पूर्वांचल की कानून-व्यवस्था से है, क्योंकि इन अवैध हथियारों का उपयोग भविष्य में बड़ी वारदातों में हो सकता था। पुलिस की टीमें अब सप्लायर, रूट, एजेंट और अंतिम खरीदार के बीच के संबंधों का पता लगाकर संगठित अपराध पर लगाम लगाने की कोशिश कर रही हैं। सभी पुराने मामलों और हालिया गिरफ्तारियों को जोड़कर एक बड़ी रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जो इस तस्करी के पूरे तंत्र को ध्वस्त करने में सहायक सिद्ध होगी।