कैलाश हॉस्टल में छात्रों का जोरदार हंगामा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित लखनऊ विश्वविद्यालय के परिसर में स्थित कैलाश हॉस्टल के अंदर रविवार को स्थिति अचानक बेहद तनावपूर्ण हो गई जब बड़ी संख्या में छात्रों ने मेस के खाने में गंभीर अनियमितताओं को लेकर खुला विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्रों का मुख्य आरोप था कि उन्हें जो भोजन परोसा जा रहा है उसमें साफ-सफाई का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा जा रहा है और भोजन की थालियों में कीड़े तथा बाल स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। गुस्साए छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मेस व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। छात्रों का यह भी कहना था कि उनसे हर महीने भारी भरकम फीस वसूली जाती है जिसके एवज में उन्हें केवल घटिया और अस्वच्छ भोजन प्रदान किया जा रहा है जिससे उनकी सेहत पर भी बुरा असर पड़ रहा है। प्रदर्शन के दौरान हॉस्टल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मियों को स्थिति संभालने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
बढ़ती फीस और खराब सुविधाओं पर उठे सवाल इस पूरे घटनाक्रम ने उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं और हॉस्टल के भारी भरकम शुल्कों के बीच के भारी अंतर को एक बार फिर से सतह पर ला दिया है। सामान्यतः विश्वविद्यालयों में आवासीय परिसरों के भीतर छात्रों से रहने और खाने के नाम पर हजारों रुपये वसूले जाते हैं ताकि उन्हें पौष्टिक और स्वच्छ भोजन तथा बेहतर जीवन स्तर मिल सके। परंतु इसके विपरीत जब छात्रों को इस तरह का दूषित और अस्वच्छ भोजन मिलता है तो उनका गुस्सा फूटना स्वाभाविक हो जाता है। लखनऊ विश्वविद्यालय जैसे बड़े संस्थानों में इस तरह की अव्यवस्थाएं प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोलती हैं और यह दर्शाती हैं कि मेस संचालन के ठेकों की निगरानी करने वाले अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी मुस्तैदी से नहीं कर रहे हैं। इस प्रकार की घटनाएं न केवल शैक्षणिक माहौल को प्रभावित करती हैं बल्कि अभिभावकों की चिंताओं को भी बढ़ा देती हैं जो अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा अपने बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षित रहने के लिए खर्च करते हैं।
राजनीतिक दलों का हमला और प्रशासनिक प्रतिक्रिया कैलाश हॉस्टल के इस बहुचर्चित हंगामे ने अब तूल पकड़ लिया है और विपक्षी राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को लेकर राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोल दिया है। कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सरकार को घेरा है और आरोप लगाया है कि प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में छात्रों के हितों की लगातार अनदेखी की जा रही है और भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुंच चुका है। राजनीतिक मोर्चे पर इस तरह के हमलों के बाद अब विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य के शिक्षा विभाग पर दबाव बढ़ गया है कि वे इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष जांच बिठाएं। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि बढ़ते विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक बयानों के चलते प्रशासन जल्द ही मेस ठेकेदार के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है और हॉस्टल के खान-पान के अनुबंध को रद्द करने का फैसला ले सकता है। इसके अलावा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए एक नई उच्चस्तरीय निगरानी समिति का गठन किए जाने की भी पूरी संभावना जताई जा रही है।