शराब के लिए पैसे न देने पर पिता की हत्या
देवरिया जिले में रिश्तों का कत्ल करने वाली पहली घटना सुरौली थाना क्षेत्र के बहोरवा गांव में सामने आई। यहां रहने वाले पैंसठ वर्षीय राम अवतार राय अपने गांव के बाहर मकान बनवाकर अकेले रहते थे। उनके दूसरे नंबर के बेटे सुनील राय उर्फ सत्तू राय को शराब पीने की बुरी लत लगी हुई थी। शुक्रवार की शाम को सुनील राय ने अपने बुजुर्ग पिता से शराब खरीदने के लिए पैसों की मांग की। जब राम अवतार राय ने उसे शराब के वास्ते रुपए देने से साफ इनकार कर दिया तो आरोपी बेटे का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उसने आवेश में आकर वहां रखे मुंगड़े से अपने ही पिता के सिर पर जोरदार प्रहार कर दिया। इस गंभीर हमले के कारण राम अवतार राय की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के इलाकों और परिवार में कोहराम मच गया। पुलिस ने इस मामले की जानकारी जुटाई और जांच शुरू कर दी। बुजुर्ग पिता की इस तरह बेरहमी से हत्या किए जाने के बाद से आरोपी बेटा और उसका परिवार गहरे सदमे और अफसोस में डूब गया है। छोटी सी बात पर हुए इस खूनी संघर्ष ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है।
आभूषण के बंटवारे को लेकर भाई की जान ली
अभी पहली घटना के कुछ ही घंटे बीते थे कि रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र के बरवा मीर छापर गांव में दूसरी सनसनीखेज वारदात हो गई। इस गांव में रहने वाले केश्वर कुशवाहा पांच भाइयों में सबसे छोटे थे और वाहन चलाने का कार्य करते थे। उनके परिवार में मां मोतिया देवी का निधन हो गया था जिसके बाद उनका तेरहवीं और ब्रह्मभोज का कार्यक्रम संपन्न हुआ था। कर्मकांड पूरा होने के बाद घर पर मां के बचे हुए आभूषणों और गहनों के बंटवारे को लेकर आपस में तीखा विवाद शुरू हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि सबसे बड़े भाई जगदम्बा और अन्य सगे संबंधियों ने मिलकर छोटे भाई केश्वर कुशवाहा के साथ मारपीट शुरू कर दी। पीट-पीटकर की गई इस हिंसा में केश्वर कुशवाहा की मौके पर ही मौत हो गई। इस निर्मम हत्याकांड से मृतक के घर में कोहराम मच गया है। केश्वर कुशवाहा अपने पूरे परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे और उनकी मौत से पत्नी प्रमिला देवी, बेटी गुड़िया तथा बेटे आलोक व अमित पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पति का शव देखकर पत्नी बेसुध होकर गिर पड़ी और बच्चों की दिल दहला देने वाली चीखों से वहां मौजूद सभी रिश्तेदारों की आंखें नम हो गईं।
रिश्तों की गिरावट और पारिवारिक पृष्ठभूमि
इन दोनों जघन्य वारदातों ने समाज में तेजी से बदलते पारिवारिक मूल्यों और रिश्तों की गिरती साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुराने समय में गांवों तथा शहरों में छोटी-मोटी कहासुनी और विवाद होने पर बुजुर्ग लोग आपस में बैठकर पंचायत करते थे और मामलों को वहीं सुलझा लेते थे। तब विवाद थानों तक बहुत कम पहुंचते थे और आपसी सौहार्द बना रहता था। लेकिन आज के दौर में मामूली बातों और छोटी-छोटी चीजों के पीछे अपने ही लोग अपनों का खून बहाने से भी नहीं हिचकिचा रहे हैं। रामपुर कारखाना के मामले में तो बड़े भाई जगदम्बा ने बचपन में छोटे भाई केश्वर को गोद में खिलाया था और उसकी हर छोटी मांग को पूरा किया था। लेकिन समय के साथ लालच इस कदर हावी हुआ कि उसी भाई ने कत्ल करने में जरा भी संकोच नहीं किया। केश्वर अपने भाइयों के साथ आए दिन होने वाली नोंकझोंक से परेशान होकर बाहर कमाने चले गए थे। वह मां की मौत की खबर मिलने पर ही वापस लौटे थे और ब्रह्मभोज के बाद उन्हें वापस अपनी नौकरी पर जाना था। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था और घर लौटने के बाद उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी। इन घटनाओं के बाद से पूरे इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं और लोग इस बात से बेहद हैरान हैं कि जरा-जरा सी बात पर रिश्तों की डोर कैसे इतनी आसानी से टूट रही है।