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नशे पर प्रहार: तकनीक को हथियार बनाकर पुलिस के मददगार बनें विद्यार्थी

विद्यार्थियों को नशे के खिलाफ जंग में तकनीक का प्रभावी उपयोग करने और पुलिस का सहयोग करने का आह्वान किया गया है, ताकि समाज को इस कुप्रथा से मुक्त किया जा सके।

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Ankit Yadav
16 सित 2026, 15:45
नशे पर प्रहार: तकनीक को हथियार बनाकर पुलिस के मददगार बनें विद्यार्थी - तिवारी
वर्तमान समय में युवाओं और विद्यार्थियों के बीच नशीले पदार्थों का बढ़ता चलन समाज के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। इस खतरे से निपटने के लिए अब रणनीतिक स्तर पर बदलाव लाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है, जिसमें युवा वर्ग खुद सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर सकता है। अधिकारियों और जानकारों का मानना है कि यदि शिक्षण संस्थानों से जुड़े छात्र सही दिशा में आगे आएं, तो आपराधिक गतिविधियों और अवैध कारोबार पर प्रभावी ढंग से लगाम लगाई जा सकती है। इसी दिशा में हाल ही में एक महत्वपूर्ण अपील जारी की गई है जिसमें विद्यार्थियों को पुलिस प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने की सलाह दी गई है।

तकनीक का सही इस्तेमाल

युवाओं के पास आज के समय में आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया की ताकत मौजूद है, जिसका उपयोग वे अपनी पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी कर सकते हैं। तिवारी ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि विद्यार्थियों को तकनीक को अपना हथियार बनाना चाहिए। यदि किसी भी स्तर पर अवैध मादक पदार्थों की तस्करी या खरीद-फरोख्त से जुड़ी कोई भी संदिग्ध गतिविधि नजर आती है, तो उसकी सटीक जानकारी तुरंत पुलिस के साथ साझा की जानी चाहिए। सूचना देने वाले की गोपनीयता बनाए रखते हुए कानून प्रवर्तन एजेंसियां इस पर तुरंत कार्रवाई कर सकती हैं, जिससे नेटवर्क को ध्वस्त करने में मदद मिलती है। नशीले पदार्थों का यह कारोबार केवल व्यक्तिगत जीवन को ही बर्बाद नहीं करता, बल्कि यह देश की युवा शक्ति की ऊर्जा को भी दीमक की तरह खोखला कर रहा है। उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में भी इस तरह के अभियानों की महत्ता को लगातार रेखांकित किया जाता रहा है ताकि जमीनी स्तर पर जनसहभागिता बढ़ाई जा सके। जब तक छात्र, युवा और आम नागरिक खुद आगे आकर इस बुराड़ी के खिलाफ आवाज बुलंद नहीं करेंगे, तब तक पूरी तरह से पूर्ण सफलता पाना कठिन होगा। पुलिस और पब्लिक के बीच का यह मजबूत तालमेल ही अपराधियों के मन में डर पैदा कर सकता है।

भविष्य की रूपरेखा

आगामी दिनों में इस प्रकार के जागरूकता अभियानों को शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों में और अधिक व्यापक स्तर पर चलाए जाने की योजना है। छात्रों को केवल सतर्क रहने तक ही सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें यह भी सिखाया जाएगा कि कैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करके समाजोपयोगी कार्य किए जा सकते हैं। इस पहल से न केवल मादक पदार्थों के तस्करों में खौफ पैदा होगा, बल्कि एक स्वस्थ, सुरक्षित और नशामुक्त शैक्षणिक माहौल का भी निर्माण हो सकेगा। अधिकारियों को उम्मीद है कि युवा पीढ़ी इस जिम्मेदारी को बखूबी समझेगी और राष्ट्र निर्माण में अपनी सार्थक भूमिका निभाएगी।
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