कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
EC के अफसर पर बिना चर्चा फैसले लेने का आरोप: RTI से खुलासा- दो चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सेक्रेटरी से शिकाय...      Bihar MLC Election 2026 Live: वोटिंग के बीच मोकामा में बवाल, अनुज सिंह और नीरज सिंह के समर्थक भिड़े      आजम खान से केवल इसलिए मिलना चाहते थे अखिलेश? AIMIM के वारिस पठान ने किया ये दावा      MLC वोटिंग से पहले आधी रात को 7 गाड़ियों में पहुंची पुलिस, पटना में RJD प्रत्याशी डॉ संजीव के घर क्या हुआ?      तिब्बत में आए शक्तिशाली भूकंप में कम से कम 16 लोगों की मौत, सैकड़ों ज़ख़्मी      ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कब और कैसे हो सकती है कार्रवाई, ओम बिरला ने बताया      बॉर्डर पर चीन से Face-Off अब भी जारी... ITBP डीजी ने बताया कैसे हमारे जवाब मुंहतोड़ जवाब देने को हैं तैयार      सौरभ दास ने बाहर आते ही किया कांड, नहीं मानी पुलिस की बात; रांका भी घिरे     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
क्राइम ब्रेकिंग

न्यायपालिका के समक्ष चौंकाने वाले आंकड़े: सुप्रीम कोर्ट में पेश रिपोर्ट में तीन सौ से अधिक सांसदों और चौदह मुख्यमंत्रियों पर आपराधिक मामले दर्ज

देश की सर्वोच्च अदालत में पेश की गई एक हालिया स्थिति रिपोर्ट ने राजनीति के अपराधीकरण के मुद्दे पर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है।

X
Kantap News डेस्क
19 अग 2026, 14:50
न्यायपालिका के समक्ष चौंकाने वाले आंकड़े: सुप्रीम कोर्ट में पेश रिपोर्ट में तीन सौ से अधिक सांसदों और चौदह मुख्यमंत्रियों पर आपराधिक मामले दर्ज
भारतीय राजनीति में शुचिता और पारदर्शिता को लेकर एक अत्यंत चिंताजनक तस्वीर देश की सर्वोच्च अदालत के सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में दाखिल की गई एक ताज़ा स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, देश भर के विभिन्न न्यायालयों में वर्तमान समय में सांसदों और विधायकों के खिलाफ कुल 4,192 आपराधिक मामले लंबित हैं। इस चौंकाने वाले आंकड़ों में यह भी खुलासा हुआ है कि इन मामलों की जद में देश के मौजूदा 326 सांसद और विभिन्न राज्यों के 14 मुख्यमंत्री तक शामिल हैं। इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद से राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है और शासन व्यवस्था में सुधार की मांग फिर से जोर पकड़ने लगी है।

राजनीति का बढ़ता अपराधीकरण

न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए इन विस्तृत आंकड़ों ने इस पुरानी और गंभीर समस्या को एक बार फिर केंद्र में ला खड़ा किया है कि आखिर कैसे राजनीति और अपराध का यह गठजोड़ लगातार मजबूत होता जा रहा है। चुनाव सुधारों की मांग करने वाले विशेषज्ञों और विभिन्न संगठनों का कहना है कि दागी छवि वाले नेताओं के राजनीति में शीर्ष पदों पर बने रहने से लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर आंच आती है। अदालत द्वारा समय-समय पर इन मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष अदालतों के गठन जैसे निर्देश दिए जाने के बावजूद मुकदमों की लंबी फेहरिस्त यह साबित करती है कि न्यायिक प्रक्रिया में अभी भी कई अड़चनें बनी हुई हैं।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त रुख की उम्मीद

जानकारों का मानना है कि इन आंकड़ों के सामने आने के बाद सर्वोच्च अदालत इस गंभीर विषय पर और अधिक सख्त दिशा-निर्देश जारी कर सकती है। नेताओं के खिलाफ चल रहे मुकदमों की सुनवाई में हो रही देरी को रोकने के लिए विशेष तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। देश के आम नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग की निगाहें अब सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाइयों पर टिकी हुई हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कानून के हाथ सभी के लिए समान रूप से लंबे हों और राजनीति को अपराध मुक्त बनाने की दिशा में कोई ठोस व ऐतिहासिक कदम उठाया जा सके।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज