विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में फर्जी दस्तावेज का खुलासा
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा द्वारा शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच के दौरान एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया गया है। पश्चिम विहार के रहने वाले पैंतालीस वर्षीय दीपक खत्री उर्फ दीपक नंदा ने उत्तर प्रदेश के अमरोहा स्थित श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया था। उसने इस संस्थान में बीए-एलएलबी पाठ्यक्रम के वास्ते दाखिला पाने के लिए जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था। विश्वविद्यालय प्रशासन को अपने आंतरिक अभिलेखों में मौजूद कागजात संदिग्ध लगने पर तुरंत कानूनी शिकायत दर्ज कराई गई। इसके परिणाम स्वरूप इस साल सितंबर महीने के आखिरी दिनों में रजबपुर थाने में एक औपचारिक प्राथमिकी पंजीकृत की गई। विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी अरुण कुमार ने इस मामले में पुलिस के सामने आधिकारिक बयान दर्ज कराया था। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि आरोपी ने जिस बारहवीं कक्षा के प्रमाण पत्र का उपयोग किया था, वह जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन के नाम पर तैयार किया गया था। अपराध शाखा के अधिकारियों ने जब संबंधित शिक्षा बोर्ड से इस कागजात का सत्यापन कराया, तब जाकर इस जालसाजी की पूरी सच्चाई सामने आई। बोर्ड ने स्पष्ट तौर पर बताया कि उनके आधिकारिक रिकॉर्ड में ऐसा कोई छात्र या परीक्षा परिणाम दर्ज नहीं है। इसके आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
हथियार तस्करी और आतंकी मॉड्यूल से जुड़े तार
अमरोहा पुलिस और दिल्ली पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के तहत आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318, 336 और 340 के अंतर्गत मुकदमे दर्ज किए गए हैं। जांच अधिकारियों के मुताबिक आरोपी वकील पिछले महीने इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरा था जिसके तुरंत बाद उसे दबोच लिया गया था। गिरफ्तारी से पहले वह दुबई, मोरक्को और थाईलैंड जैसे देशों की यात्रा कर चुका था। इस साल मार्च के महीने में हथियार तस्करी के एक बड़े मामले का खुलासा होने के बाद इस वकील की संदिग्ध भूमिका जांच के दायरे में आई थी। बांग्लादेश के रास्ते हथियार सप्लाई करने वाले शाहबाज अंसारी नाम के एक तस्कर की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में इसका नाम सामने आया था। तस्कर ने पुलिस को बताया था कि आरोपी भारत के भीतर हथियारों के सौदों को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने में सक्रिय रूप से शामिल था। मार्च महीने में ही तकनीकी सर्विलांस के आधार पर कई राज्यों में बड़े पैमाने पर छापेमारी अभियान चलाया गया था। उस दौरान पुलिस ने कुल अट्ठारह आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए भारी मात्रा में हथियार और जिंदा कारतूस बरामद किए थे। पूछताछ के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि वे हथियार सार्वजनिक आयोजनों में अंधाधुंध गोलीबारी करके समाज में आतंक फैलाने के उद्देश्य से जुटाए जा रहे थे। इसी मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने जून के महीने में इस वकील के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी कर दिया था।
गैंगस्टर से पुराना नाता और वकालत की शुरुआत
कानूनी शिक्षा प्राप्त करने और लाइसेंस हासिल करने से काफी पहले से ही यह व्यक्ति कुख्यात अपराधी लॉरेंस बिश्नोई के संपर्क में बना हुआ था। पिछले एक दशक से अधिक समय से वह जेल में बंद इस गैंगस्टर के विभिन्न मामलों और उसके सहयोगियों से लगातार जुड़ा रहा है। अमरोहा के निजी विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने दिल्ली बार काउंसिल में अपना पंजीकरण कराया और निचली अदालतों में वकालत करने लगा था। हालांकि इससे पहले भी वह जेल में बंद अपराधी के लिए वकीलों की व्यवस्था करने और अदालती समझौतों को निपटाने का काम बखूबी संभालता था। वर्ष 2023 के दौरान पुलिस के स्पेशल सेल में दर्ज एक अन्य मामले में भी इसका नाम सामने आ चुका है। उस मामले में एक शिकायतकर्ता ने गंभीर आरोप लगाया था कि उससे मामला रफा-दफा करने की एवज में ढाई करोड़ रुपये की मांग की गई थी। अधिकारियों के अनुसार इसका अपराध जगत से जुड़ाव केवल कानूनी सहायता तक सीमित नहीं था बल्कि यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संचालित हो रहे आतंकी तंत्र का भी हिस्सा था। पुलिस पूछताछ के दौरान इसने स्वीकार किया कि वह अंतरराष्ट्रीय मॉड्यूल के जरिए अवैध गतिविधियों में संलिप्त रहा है। अब विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए फर्जी मार्कशीट इस्तेमाल करने का नया मामला जुड़ जाने से इसकी कानूनी मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं। पुलिस इस मामले के अन्य पहलुओं की गहराई से छानबीन कर रही है।